अमेरिका : एआई दौड़ के बीच लॉमेकर्स और विशेषज्ञों ने जताई चिंता, बढ़ रहे साइबर खतरे


वॉशिंगटन, 7 जून (आईएएनएस)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) साइबर सुरक्षा की दुनिया को तेजी से बदल रहा है। यह एक तरफ सुरक्षा के लिए शक्तिशाली नए उपकरण दे रहा है, तो दूसरी तरफ अपराधियों और दुश्मन देशों को क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला करने के नए तरीके भी दे रहा है। अमेरिका की कांग्रेस में हुई एक सुनवाई के दौरान तकनीकी विशेषज्ञों और सांसदों ने इस बारे में चिंता जताई।

यह सुनवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करने के कुछ दिनों बाद हुई। इस आदेश में संघीय एजेंसियों को उन्नत एआई की साइबर क्षमताओं का मूल्यांकन करने के लिए एक ढांचा तैयार करने और सरकार और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के संचालकों को अत्याधुनिक एआई मॉडलों तक अधिक पहुंच देने का निर्देश दिया गया है।

विशेषज्ञों ने साइबर सिक्योरिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन पर हाउस होमलैंड सिक्योरिटी सबकमेटी के सदस्यों को बताया कि एआई सॉफ्टवेयर की कमजोरियों को खोजने की प्रक्रिया को तेज कर रहा है। साइबर हमलों की रफ्तार बढ़ा रहा है और अमेरिका तथा चीन के बीच प्रतिस्पर्धा को और तीव्र बना रहा है।

उपसमिति के अध्यक्ष एंडी ओगल्स ने कहा, “ये एआई मॉडल पहले ही खतरे के माहौल को बदल रहे हैं, और संघीय सरकार ऐसी आखिरी संस्था नहीं हो सकती, जिसे समझ आए कि ये क्या कर सकते हैं।”

गूगल थ्रेट इंटेलिजेंस ग्रुप की उपाध्यक्ष सैंड्रा जॉयस ने कहा कि साइबर अपराधी पहले से ही एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं।

उन्होंने गवाही में कहा, “हाल ही में हमारी चिंताओं की पुष्टि तब हुई जब हमें पहली बार ऐसे सबूत मिले कि साइबर अपराधियों ने एक जीरो-डे एक्सप्लॉइट विकसित करने के लिए एआई का उपयोग किया था।”

उन्होंने बताया कि हमलावर एआई की मदद से कमजोरियों को तेजी से ढूंढ रहे हैं और नेटवर्क के भीतर पारंपरिक सुरक्षा टीमों की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

उन्होंने कहा, “खतरा पैदा करने वाले लोग एआई की मदद से नेटवर्क में घुसने से पहले और बाद दोनों समय बहुत तेजी से काम कर सकते हैं। वे कमजोरियों का फायदा हमारे पैच लगाने से पहले उठा सकते हैं और ऑटोनॉमस एजेंट्स की मदद से नेटवर्क में तेजी से आगे बढ़ सकते हैं।”

फ्रंटियर मॉडल फोरम के कार्यकारी निदेशक क्रिस मेसेरोल ने कहा कि उन्नत एआई सिस्टम अवसर और खतरे दोनों लेकर आते हैं।

उन्होंने कहा, “अगर कोई एआई एजेंट जीरो-डे कमजोरियां खोज सकता है, तो वह किसी रक्षक (डिफेंडर) के हाथ में हमारी सुरक्षा कर सकता है, लेकिन किसी हमलावर के हाथ में वही चीज खतरा बन सकती है।”

मेसेरोल ने चेतावनी दी कि विदेशी प्रतिस्पर्धी ‘एडवर्सेरियल डिस्टिलेशन’ नामक तकनीक का इस्तेमाल करके उन्नत एआई सिस्टम की क्षमताओं की नकल कर सकते हैं और साथ ही उनकी सुरक्षा सीमाओं को भी हटा सकते हैं।

उन्होंने कहा, “विदेशी पक्ष इस तकनीक का इस्तेमाल करके अपने एआई विकास को तेज कर सकते हैं और फिर उसकी क्षमताओं का उपयोग अमेरिकी महत्वपूर्ण ढांचे के खिलाफ कर सकते हैं।”

कॉरिडोर सिक्योरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और साइबरसिक्योरिटी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी एजेंसी (सीआईएसए) के पूर्व सलाहकार जैक केबल ने कहा कि एआई साइबर जोखिमों की गति और पैमाना दोनों बढ़ा रहा है।

उन्होंने कहा, “सबसे बड़ी चुनौती यह नहीं है कि एआई नई तरह की कमजोरियां पैदा कर रहा है। असली चुनौती यह है कि एआई कमजोरियों को पैदा करने, खोजने और उनका फायदा उठाने की रफ्तार और संख्या दोनों को बहुत बढ़ा देता है।”

केबल का कहना था कि सरकारों और कंपनियों को सिर्फ बाद में समस्याएं ठीक करने पर निर्भर रहने के बजाय शुरुआत से ही सॉफ्टवेयर में कमजोरियां आने से रोकने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

सुनवाई के दौरान चीन का मुद्दा बार-बार उठा। सांसदों ने गवाहों से चीनी एआई मॉडलों के बढ़ते वैश्विक प्रभाव के बारे में सवाल किए।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका प्रतिस्पर्धा में पीछे रह गया, तो कम लागत वाले चीनी एआई सिस्टम सॉफ्टवेयर विकास, क्लाउड कंप्यूटिंग और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने लग सकते हैं।

–आईएएनएस

एवाई/


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