जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिलाने के लिए राजनीतिक एकता जरूरी : सतीश शर्मा

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जम्मू, 6 जून (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों की हालिया बैठक के दौरान कांग्रेस पार्टी की गैर-मौजूदगी को लेकर सियासी चर्चा तेज हो गई है। इस मुद्दे पर कैबिनेट मंत्री सतीश शर्मा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य का दर्जा (स्टेटहुड) बहाल करने की मांग को लेकर सभी राजनीतिक दलों को एक साथ आकर काम करना होगा।

सतीश शर्मा ने कहा कि यह समय किसी राजनीतिक भेदभाव का नहीं है, बल्कि एक साझा लक्ष्य के लिए एकजुट होने का है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार या दलों के बीच किसी तरह की दूरी नहीं रखी जा रही है और सभी को मिलकर उस अधिकार को वापस लाने के लिए प्रयास करना चाहिए, जो राज्य से छीना गया है। मंत्री ने कहा कि वे कांग्रेस और अन्य दलों को भी इस प्रयास के लिए साथ आने का आह्वान करते हैं।

सतीश शर्मा ने कहा कि विधानसभा में पहले भी इस मुद्दे पर प्रस्ताव लाया गया था और सरकार की प्राथमिकता हमेशा से स्टेटहुड की बहाली रही है। उन्होंने कहा कि बारिश, सुरक्षा स्थिति और अन्य परिस्थितियों के कारण कुछ प्रक्रियाओं में देरी जरूर हुई है, लेकिन लक्ष्य स्पष्ट है और सरकार उसी दिशा में काम कर रही है।

उन्होंने इतिहास का जिक्र करते हुए महाराजा हरि सिंह, महाराजा गुलाब सिंह और महाराजा रणजीत सिंह जैसे शासकों को याद किया और कहा कि उनके योगदान को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब राज्य की पहचान और उसका गौरव फिर से स्थापित हो।

उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे एकजुट होकर इस मुद्दे को उठाएं, ताकि जम्मू-कश्मीर के लोगों की आवाज मजबूत तरीके से सामने आ सके। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक पार्टी की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जनता की है।

मंत्री ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर के सभी समुदायों डोगरा, गुर्जर और अन्य को साथ लेकर चलने की आवश्यकता है, ताकि सामाजिक और राजनीतिक एकता मजबूत हो सके। उन्होंने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र हमेशा से विविधता और एकता का प्रतीक रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में जब कोई राज्य अपनी मांग रखता है, तो वहां सभी दल एक साथ खड़े होते हैं, उसी तरह जम्मू-कश्मीर के लिए भी एक साझा दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।

सतीश शर्मा ने कहा कि वर्तमान वैश्विक और राजनीतिक परिस्थितियों में समाज को जाति और धर्म से ऊपर उठकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर के भविष्य को लेकर सभी को एक मंच पर आना होगा।

–आईएएनएस

पीआईएम/एबीएम

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