सैफ विमेंस चैंपियनशिप: बांग्लादेश को 3-1 से शिकस्त देकर भारत 7 साल बना चैंपियन


मार्गाओ (गोवा), 6 जून (आईएएनएस)। भारत ने सात साल बाद सैफ विमेंस चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम कर लिया है। शनिवार को गोवा के मार्गाओ में पंडित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में खेले गए फाइनल में भारतीय टीम ने मौजूदा चैंपियन बांग्लादेश को 3-1 से मात दी।

प्यारी जाक्सा ने 42वें मिनट में भारत को बढ़त दिलाई, लेकिन पहले हाफ के स्टॉपेज टाइम में ऋतु पोर्ना चकमा ने गोल करके स्कोर बराबर कर दिया। दूसरे हाफ के शुरू होने के सिर्फ 40 सेकंड बाद सनफिदा नोंग्रम ने ‘ब्लू टाइग्रेस’ को फिर से बढ़त दिला दी। इसके बाद सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी लिंडा कॉम सर्टो ने 82वें मिनट में गोल करके जीत पक्की कर दी और भारत ने रिकॉर्ड छठी बार यह ट्रॉफी जीती।

मनीषा कल्याण ने टूर्नामेंट में पहली बार शुरुआती लाइन-अप में जगह बनाई। सनफिदा नोंग्रम ने सबसे पहले खतरा पैदा किया; उन्होंने मुश्किल एंगल से कोशिश की, लेकिन उनका शॉट बार के ऊपर से निकल गया। 16वें मिनट में भारत गोल करने के और करीब पहुंचा, जब बांग्लादेश की गोलकीपर माइल अख्तर, निर्मला देवी फंजौबम की लंबी बॉल को ठीक से संभाल नहीं पाईं। बॉल अस्ताम ओराओन के पास आई, लेकिन डिफेंडर उसे सही निशाने पर नहीं भेज पाईं।

हालांकि, बांग्लादेश की टीम खतरनाक बनी रही। 23वें मिनट में ऋतु पोर्ना चकमा ने नेपाल के खिलाफ सेमीफाइनल जैसा कमाल लगभग दोहरा ही दिया था; उन्होंने कॉर्नर से सीधे गोल की तरफ बॉल को घुमाया, जो क्रॉसबार के ठीक ऊपर से निकल गई।

क्रिसपिन छेत्री की टीम लगातार आगे बढ़ती रही। निर्मला के क्रॉस पर अवेका सिंह का हेडर थोड़ा बाहर चला गया। 38वें मिनट में माइल अख्तर ने मनीषा कल्याण की जबरदस्त हाफ-वॉली को शानदार तरीके से रोक दिया।

आखिरकार हाफ-टाइम से तीन मिनट पहले भारत को सफलता मिली। प्यारी जाक्सा ने पेनाल्टी एरिया के अंदर फुर्ती दिखाते हुए शॉट मारा। सुरोवी अख्तर ने उस शॉट को रोकने की कोशिश की, लेकिन बॉल डिफ्लेक्ट होकर आगे बढ़ रही माइल अख्तर के ऊपर से होती हुई नेट में चली गई।

ऐसा लगा कि इस गोल से भारत को हाफ-टाइम से पहले बढ़त मिल गई है, लेकिन बांग्लादेश ने तुरंत जवाब दिया। पहले हाफ के स्टॉपेज टाइम में, ऋतु पोर्ना चकमा को बाईं ओर जगह मिली और उन्होंने पंथोई चानू इलांगबम की पहुंच से दूर, कोने में एक लो-शॉट मारा। यह इस टूर्नामेंट में भारत के खिलाफ किसी टीम का पहला गोल था और इसके साथ ही दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर हाफ-टाइम में गईं।

खेल दोबारा शुरू होने के कुछ ही सेकंड बाद, प्यारी ने गोल करने में मदद की। दाईं तरफ से उनके क्रॉस पर सनफिदा नोंग्रम ने बिना किसी रुकावट के ऊंची छलांग लगाई और पोस्ट के सहारे जबरदस्त हेडर मारकर भारत को फिर से बढ़त दिलाई।

इस गोल ने मैच का रुख बदल दिया। भारत ज्यादा शांत और आत्मविश्वास से भरा हुआ लग रहा था, जबकि बांग्लादेश पहले जैसा अटैकिंग रिदम बनाने के लिए संघर्ष कर रहा था। भारत लगातार मौके बनाता रहा और मनीषा के जरिए अपनी बढ़त को और बढ़ाने के करीब पहुंचा; सनफिदा की बेहतरीन दौड़ और पास के बाद मनीषा की वॉली थोड़ी बाहर चली गई। भारत ने मौके का फायदा उठाया और 82वें मिनट में अपना तीसरा गोल किया। डिफेंस की एक गलती की वजह से सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी लिंडा कॉम सर्टो को बॉक्स के अंदर गोल करने का मौका मिला। उन्होंने तेजी से रिएक्ट किया और माइल अख्तर को छकाते हुए गेंद को गोल में डालकर स्कोर 3-1 कर दिया। इस गोल ने मैच का नतीजा लगभग तय कर दिया और यह पक्का हो गया कि अब कोई बड़ा उलटफेर नहीं होगा।

जैसे ही अंतिम सीटी बजी, भारतीय टीम और उनके समर्थक खुशी से झूम उठे क्योंकि इस जीत का महत्व भारतीय खेमे में साफ दिख रहा था। पूरे टूर्नामेंट में अहम भूमिका निभाने वाली सनफिदा नोंग्रम घुटनों के बल बैठ गईं और अपनी साथी खिलाड़ी डैंगमेई ग्रेस को गले लगाया, जिन्होंने मैच के बाद संन्यास की घोषणा की। उनके आस-पास खिलाड़ी और स्टाफ जश्न मना रहे थे क्योंकि भारत साल 2019 के बाद पहली बार साउथ एशियन महिला फुटबॉल में शीर्ष पर लौटा था। भारतीय महिला फुटबॉल की दिग्गज खिलाड़ी ग्रेस ने साल 2013 में अपने डेब्यू के बाद से 95 बार देश का प्रतिनिधित्व किया और अपना तीसरा सैफ खिताब जीतकर शानदार अंदाज में अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का समापन किया। यह जीत मेजबान टीम के लिए एक शानदार अभियान का समापन थी, जिसने अपने चारों मैच जीते। इस दौरान 18 गोल किए और सिर्फ एक गोल खाया।

अवेका सिंह चार गोल के साथ टूर्नामेंट की टॉप स्कोरर रहीं। सैनफिडा नोंग्रम को ‘मोस्ट वैल्युएबल प्लेयर’ चुना गया, जबकि पंथोई चानू इलांगबम को ‘बेस्ट गोलकीपर’ का अवॉर्ड मिला। नेपाल ने ‘फेयर प्ले’ अवॉर्ड जीता।

–आईएएनएस

आरएसजी


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