राजधानी में लगातार बढ़ रहे तापमान के बीच नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान में वन्यजीवों को गर्मी से बचाने के लिए किए गए इंतजाम सवालों के घेरे में हैं। चिड़ियाघर प्रशासन की ओर से स्प्रिंकलर, कूलर, ताजा पानी और छायादार व्यवस्था के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। कई बाड़ों में लगे स्प्रिंकलर बंद पड़े हैं, जबकि कुछ स्थानों पर जानवरों को गंदे और गर्म पानी वाले तालाबों में समय बिताने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
स्प्रिंकलर बंद, तालाबों में गंदा पानी
चिड़ियाघर के मुख्य द्वार से शुरू होने वाली डीयर लाइन में ब्लैक बक, बारासिंघा और चीतल जैसे वन्यजीवों के बाड़ों में लगाए गए स्थायी स्प्रिंकलर लंबे समय से निष्क्रिय दिखाई दिए। भीषण गर्मी के बीच इन वन्यजीवों के पास राहत के सीमित साधन ही नजर आए। ऐसे में कई जानवर दिन का अधिकांश समय पानी के आसपास बिताते देखे गए। स्थिति केवल हिरण वर्ग के बाड़ों तक सीमित नहीं है। बतखों और अन्य जलपक्षियों के बाड़ों में बने तालाबों की हालत भी चिंताजनक है। समरसेबल और ओवरहेड टैंक से पानी की आपूर्ति की व्यवस्था होने के बावजूद कई तालाबों में गंदगी जमा दिखाई दी।
कई बाड़ों से गायब हुई छायादार शीटें
नियमित सफाई और पानी की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं, घड़ियाल, मगरमच्छ, दरियाई घोड़े समेत कई वन्यजीवों और पक्षियों को तेज धूप से बचाने के लिए बाड़ों के ऊपर लगाई गई हरे रंग की शेड शीट भी कई स्थानों पर गायब मिली। इससे दिन के समय जानवरों को सीधे धूप का सामना करना पड़ रहा है। चिड़ियाघर प्रशासन का दावा है कि गर्मी से बचाव के लिए वन्यजीवों को खीरा, तरबूज, खरबूजा और आम जैसे मौसमी फल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पक्षियों के लिए अतिरिक्त खनिज और पोषक तत्वों की व्यवस्था भी की गई है।
