चीन से जुड़े डेटा सुरक्षा के डर को ट्रंप ने किया खारिज, बोले- चिंता की बात नहीं


वॉशिंगटन, 5 जून (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच संबंध स्थिर बने हुए हैं। साथ ही, उन्होंने चीन के अमेरिका में डेटा सेंटर परियोजनाओं के विरोध को कथित समर्थन दिए जाने को कोई बड़ा खतरा मानने से इनकार किया।

व्हाइट हाउस में बातचीत के दौरान ट्रंप ने इस धारणा को खारिज कर दिया कि अमेरिकी तकनीकी ढांचे के खिलाफ चीन के प्रभाव अभियान कोई बड़ा खतरा हैं।

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें चिंता है कि चीन अमेरिका में डेटा सेंटर विरोधी आंदोलन को फंडिंग दे रहा है, तो ट्रंप ने जवाब दिया, “नहीं, मुझे इसकी चिंता नहीं है।”

राष्ट्रपति ने इसके बजाय दोनों देशों के बीच हाल में हुई कूटनीतिक बातचीत का जिक्र करते हुए कहा, “चीन के साथ हमारी बहुत अच्छी बैठक हुई।”

ट्रंप ने जासूसी और निगरानी को लेकर जताई जा रही चिंताओं को भी अधिक महत्व नहीं दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास उन्नत क्षमताएं हैं।

उन्होंने कहा, “लोग पूछते हैं, क्या आपको चिंता है कि चीन आपका फोन टैप कर रहा है? मैंने कहा, वे भी शायद इसी बात को लेकर चिंतित होंगे।”

ये टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं, जब ट्रंप प्रशासन ऊर्जा उत्पादन और एआई को अमेरिका की आर्थिक प्रतिस्पर्धा के प्रमुख आधार के रूप में पेश कर रहा है।

ट्रंप ने कहा कि एआई की वैश्विक दौड़ में सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि किसी देश के पास पर्याप्त और भरोसेमंद ऊर्जा उपलब्ध है या नहीं। यह प्रतिस्पर्धा अब अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता से जुड़ी हुई है।

उन्होंने कहा, “एआई बहुत बड़ी चीज है। भारी मात्रा में ऊर्जा के बिना आप इस दौड़ में शामिल भी नहीं हो सकते।”

ट्रंप ने कहा, “हम एआई के क्षेत्र में चीन से काफी आगे हैं। मैं इस बारे में राष्ट्रपति शी से बात कर रहा था।”

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की प्राथमिकताओं में से एक बड़ी ऊर्जा और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी देना है, ताकि एआई के विकास को समर्थन मिल सके।

ट्रंप ने पर्यावरण संरक्षण एजेंसी के प्रशासक ली जेल्डिन की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने नियामकीय मंजूरियों की प्रक्रिया तेज कर दी है। उन्होंने कहा कि उन्नत एआई सुविधाएं विकसित करने वाली कंपनियों को अब अपनी बिजली उत्पादन क्षमता विकसित करने की अनुमति भी दी जा रही है।

ट्रंप ने कहा, “हमने जो सबसे बड़े कामों में से एक किया है, वह यह है कि हमने इन प्रतिभाशाली लोगों को, जिनके पास बहुत पैसा है, अपना खुद का बिजली संयंत्र बनाने की अनुमति दी है।”

ट्रंप के अनुसार, इस नीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बड़े एआई प्रोजेक्ट मौजूदा बिजली नेटवर्क पर अत्यधिक दबाव न डालें।

उन्होंने कहा, “वे एक तरफ बिजली संयंत्र बना रहे हैं और साथ ही बिजली का उत्पादन भी कर रहे हैं। अगर हमने ऐसा नहीं किया होता, तो कुछ भी संभव नहीं हो पाता।”

ऊर्जा नीति पर व्यापक चर्चा के दौरान भी चीन का कई बार जिक्र हुआ। ट्रंप ने कोयला उत्पादन और कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के समर्थन का बचाव करते हुए चीन का उदाहरण दिया।

उन्होंने कहा, “अगर आप चीन और कई अन्य सफल देशों को देखें, तो वे कोयले का इस्तेमाल कर रहे हैं।”

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि चीन एक तरफ अपने यहां कोयला आधारित ढांचे का विस्तार कर रहा है, जबकि दूसरी ओर दुनिया को नवीकरणीय ऊर्जा तकनीकें निर्यात कर रहा है।

उन्होंने कहा, “चीन ने पिछले साल 52 कोयला बिजली संयंत्र बनाए।”

अमेरिका-चीन संबंध अभी भी व्यापार, प्रौद्योगिकी, सैन्य प्रभाव और आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़े विवादों से प्रभावित हैं। एआई इस प्रतिस्पर्धा का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुकी है, जहां दोनों देश कंप्यूटिंग ढांचे, सेमीकंडक्टर विकास और अगली पीढ़ी की एआई प्रणालियों को ऊर्जा देने के लिए आवश्यक संसाधनों में भारी निवेश कर रहे हैं।

–आईएएनएस

एएमटी/एएस


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