दुबई बेस्ड भारतीय बैंकर श्रद्धा गुप्ता ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर की चढ़ाई

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नई दिल्ली, 1 जून (केसरिया न्यूज़)। भारतीय पर्वतारोही श्रद्धा गुप्ता ने सफलतापूर्वक माउंट एवरेस्ट (8,849 मीटर) पर चढ़ाई पूरी कर ली है, जो पृथ्वी का सबसे ऊंची चोटी है। उन्होंने पर्वतारोहण की सबसे चुनौतीपूर्ण उपलब्धियों में से एक को हासिल किया है। यह चढ़ाई उन्होंने एलीट एक्सपेडिशन्स के साथ की, जिसकी स्थापना रिकॉर्ड तोड़ने वाले पर्वतारोही निर्मल पुरजा ने की थी।

यह गुप्ता के तेजी से बढ़ते पर्वतारोहण करियर में अब तक की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसने उन्हें दुबई में शौकिया पर्वतारोहण से लेकर दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत के शिखर तक महज तीन वर्षों में पहुंचा दिया है।

गुप्ता की एवरेस्ट चढ़ाई 26 सितंबर, 2025 को विश्व के आठवें सबसे ऊंचे पर्वत, माउंट मनास्लू (8,163 मीटर) पर ऐतिहासिक शिखर प्राप्ति के बाद हुई है। इस चढ़ाई ने उन्हें 8,000 मीटर पर्वतारोहण की विशिष्ट दुनिया में प्रवेश दिलाया और उन्हें पर्वतारोहण में भारत के उभरते नामों में से एक के रूप में स्थापित किया।

नेपाल-तिब्बत सीमा पर हिमालय में समुद्र तल से 8,849 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एवरेस्ट, दुनिया भर के उच्च-ऊंचाई वाले पर्वतारोहियों का सर्वोच्च लक्ष्य है।

यह शिखर पर्वतारोहियों द्वारा ‘मृत्यु क्षेत्र’ कहे जाने वाले क्षेत्र में स्थित है – 8,000 मीटर से ऊपर की वह ऊंचाई जहां ऑक्सीजन का स्तर समुद्र तल के स्तर का एक तिहाई हो जाता है, और मानव शरीर इतनी तेजी से कमजोर होने लगता है कि उससे उबरना मुश्किल हो जाता है।

हिमालयी अभियानों से पहले, गुप्ता पहले ही सात महाद्वीपों की तीन सबसे ऊंची चोटियों पर चढ़ाई कर चुकी थीं। उन्होंने अफ्रीका में माउंट किलिमंजारो (5,895 मीटर), यूरोप में माउंट एल्ब्रस (5,642 मीटर) और दक्षिण अमेरिका में एकॉनकागुआ (6,961 मीटर) पर चढ़ाई की, साथ ही एवरेस्ट बेस कैंप तक की यात्रा भी पूरी की।

सात शिखरों से 8,000 मीटर ऊंची चोटियों तक की उनकी प्रगति उच्च-ऊंचाई वाले पर्वतारोहण के प्रति उनके सुनियोजित और अनुशासित दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसमें दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण भूभागों का सामना करने से पहले चरण दर चरण ऊंचाई का अनुभव, तकनीकी कौशल और शारीरिक अनुकूलन का निर्माण करना शामिल है।

गुप्ता की कहानी को जो बात बेहद प्रेरणादायक बनाती है, वह है उनका सफर। उन्होंने लगभग तीन साल पहले ही पर्वतारोहण शुरू किया, जब महामारी के बाद प्रकृति के प्रति उनका जुनून फिर से जागृत हुआ। इतने कम समय में ही उन्होंने शौकिया पर्वतारोहण से पृथ्वी के सबसे ऊंचे शिखर पर पहुंचने का सफर तय कर लिया है — यह उपलब्धि हासिल करने में अधिकांश पर्वतारोहियों को एक दशक या उससे अधिक समय लग जाता है।

गुप्ता दुबई की निवासी हैं और सिंगापुर स्थित वित्तीय संस्थान डीबीएस बैंक में मध्य पूर्व में कॉर्पोरेट व्यवसाय की प्रमुख हैं। उन्होंने सिंगापुर के राष्ट्रीय विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी करने के बाद 2006 में सिंगापुर के डीबीएस बैंक में बैंकिंग क्षेत्र में अपना करियर शुरू किया।

पर्वतारोहण में उनकी उपलब्धियां अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग में एक चुनौतीपूर्ण वरिष्ठ नेतृत्व भूमिका के साथ-साथ हासिल की गई हैं — यह एक ऐसा दोहरापन है जिसका वे स्वयं उदाहरण हैं, और उन्हें उम्मीद है कि यह उन लोगों को प्रेरित करेगा जो मानते हैं कि परिवर्तनकारी लक्ष्य केवल पेशेवर जीवन के दबावों से बाहर ही संभव हैं।

उनका सफर दृढ़ता की भी कहानी है। हर पर्वतारोहण अभियान के लिए महीनों की तैयारी, शारीरिक क्षमता और मानसिक दृढ़ता की आवश्यकता होती है — और एवरेस्ट तो अपने आप में एक अलग ही श्रेणी का पर्वत है। यह पर्वत पर्वतारोहियों की न केवल शारीरिक बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी परीक्षा लेता है, जिसमें शिखर तक पहुंचने का सीमित अवसर मिलने से पहले हफ्तों तक अनुकूलन, अत्यधिक ठंड, तकनीकी खतरों और अनिश्चितता को सहन करने की इच्छाशक्ति शामिल है।

–केसरिया न्यूज़

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