बीजिंग, 31 मई (आईएएनएस)। चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (एनबीएस) द्वारा रविवार को जारी सर्वेक्षण के अनुसार, चीन के विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र की गतिविधियां मई में और धीमी पड़ गईं। नए निर्यात ऑर्डरों में गिरावट और बढ़ती उत्पादन लागत के कारण उद्योग पर दबाव बढ़ा है।
आंकड़ों के मुताबिक, आधिकारिक विनिर्माण परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) अप्रैल के 50.3 अंक से घटकर मई में 50 अंक पर आ गया, जो तीन महीने का निचला स्तर है। पीएमआई में 50 अंक का स्तर वृद्धि और गिरावट के बीच की सीमा माना जाता है।
आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान उत्पादन में वृद्धि हुई, लेकिन मांग और कमजोर पड़ गई। विनिर्माण पीएमआई सर्वेक्षण में उत्पादन उप-सूचकांक 51.2 और नए ऑर्डर का उप-सूचकांक 49.9 दर्ज किया गया।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण मई में नए निर्यात ऑर्डर 50.3 से गिरकर 48.6 पर पहुंच गए।
इन आंकड़ों ने चीन सरकार की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। सरकार पहले से ही आपूर्ति और मांग के बीच बढ़ते असंतुलन की चुनौती का सामना कर रही है। चीन की अर्थव्यवस्था लंबे समय से निर्यात पर अत्यधिक निर्भर रही है, लेकिन अब निर्यात पहले जैसी गति से आर्थिक विकास को सहारा नहीं दे पा रहा है।
दूसरी ओर, कई देश भी सस्ते चीनी उत्पादों की बाढ़ को रोकने के लिए कदम उठा रहे हैं, क्योंकि इससे उनके घरेलू उद्योगों, आर्थिक विकास और रोजगार पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय संघ (ईयू) के प्रमुख सदस्य देश ऐसे देशों से आने वाले सस्ते उत्पादों की बाढ़ को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिनके पास “औद्योगिक अति-क्षमता” है, जैसे कि चीन।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रुसेल्स में चीन को लेकर होने वाली एक महत्वपूर्ण बहस से कुछ दिन पहले स्पेन, इटली, नीदरलैंड, फ्रांस और लिथुआनिया द्वारा हस्ताक्षरित एक दस्तावेज में कहा गया कि यूरोपीय संघ को “व्यवस्थित और संरचनात्मक औद्योगिक अति-क्षमता” के खिलाफ अधिक आक्रामक प्रतिक्रिया देनी चाहिए। इन शब्दों को अक्सर चीन के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता है।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब यूरोपीय आयोग शुक्रवार को चीन नीति पर एक विशेष चर्चा करने जा रहा है, जिसका उद्देश्य चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण सरकारों और उद्योगों द्वारा उठाई जा रही चिंताओं के बीच नई रणनीति तैयार करना है।
यह दस्तावेज, जिसे अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है और जिसकी जानकारी सबसे पहले फाइनेंशियल टाइम्स ने दी थी, इसमें यूरोपीय संघ से क्षेत्र-विशेष व्यवधानों के लिए सुरक्षा उपायों का अधिक आक्रामक उपयोग करने की मांग की गई है। यह मौजूदा उत्पाद-आधारित एंटी-डंपिंग मामलों की तुलना में व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की वकालत करता है।
इन सुरक्षा उपायों के तहत ऐसे मामलों में शुल्क (टैरिफ) या आयात कोटा लगाया जा सकता है, जहां आयात में तेज वृद्धि से स्थानीय उद्योग को नुकसान पहुंच रहा हो।
अतीत में इन उपायों का सीमित उपयोग किया गया है। विशेष रूप से चीन से स्टील और फेरोएलॉय जैसे उत्पादों के आयात में वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए इनका सहारा लिया गया था। फेरोएलॉय स्टील उद्योग में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण उत्पाद हैं।
–आईएएनएस
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