पटना, 30 मई (आईएएनएस)। पटना में सर्कुलर रोड स्थित पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी बंगले को लेकर विवाद और गहरा गया है। सत्ताधारी एनडीए और विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता इस मुद्दे पर एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगा रहे हैं। इस बीच पटना जिला प्रशासन ने राजद नेता राबड़ी देवी से नव-आवंटित आवास संख्या 39, हार्डिंग रोड में शिफ्ट करने का अनुरोध किया है। प्रशासन ने राजद नेता को 15 दिन का समय दिया है, जिसके बाद कानूनी कार्रवाई की बात कही गई है।
असल में, यह विवाद तब और बढ़ गया जब बिहार विधानसभा में विपक्ष की नेता और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने कथित तौर पर राज्य सरकार से नोटिस मिलने के बावजूद बंगला खाली करने से इनकार कर दिया।
राबड़ी देवी के इस रुख पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बिहार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि बिहार में कानून का राज है, और कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी छोटा या बड़ा हो, स्थापित कानूनों और नियमों से ऊपर नहीं हो सकता।
सरावगी ने कहा, “सरकारी आवास सार्वजनिक संपत्ति हैं जिनका रखरखाव करदाताओं के पैसे से होता है और इनका आवंटन सरकारी नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार ही किया जाता है।” उन्होंने तर्क दिया कि सरकारी आदेशों की अवहेलना लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मानदंडों को कमजोर करती है।
सरावगी ने आरोप लगाया कि लालू प्रसाद यादव परिवार की राजनीति लंबे समय से इस धारणा से प्रेरित रही है कि राजनीतिक सत्ता और सरकारी संसाधन सार्वजनिक धरोहर नहीं बल्कि व्यक्तिगत अधिकार हैं। उन्होंने दावा किया कि बिहार के लोग दशकों से इस मानसिकता के दुष्परिणाम देख रहे हैं और अब इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।
राबड़ी देवी द्वारा सरकार को दी गई कथित चुनौती की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणियां कानून के शासन और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अनादर दर्शाती हैं। सरावगी ने आगे कहा, “लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है। सरकारी नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं, इसलिए कानून के अनुसार सरकारी आवास खाली किया जाना चाहिए।”
उन्होंने एक राजनीतिक प्रश्न भी उठाया और पूछा कि क्या राबड़ी देवी को दलित समुदाय के एक सदस्य को विशाल सरकारी आवास आवंटित किए जाने पर आपत्ति है, और क्या ऐसा आवास केवल कुछ चुनिंदा लोगों का विशेषाधिकार बना रहना चाहिए?
हालांकि, विपक्ष ने सरकार के इस रुख को सिरे से खारिज कर दिया।
बेदखली नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने एनडीए सरकार पर लोकतांत्रिक मर्यादा और राजनीतिक शिष्टाचार का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
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