मुंबई, 30 मई (केसरिया न्यूज़)। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली और सामान्य से कम मानसून के पूर्वानुमान के कारण खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंकाओं के बीच भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में इस सप्ताह उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।
सप्ताह के दौरान निफ्टी में 0.72 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि अंतिम कारोबारी दिन यह 1.50 प्रतिशत फिसलकर 23,547.75 पर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स 1,092 अंक यानी 1.44 प्रतिशत गिरकर 74,775 के स्तर पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह में सेंसेक्स में 0.85 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार में बड़े शेयरों (लार्ज कैप) पर दबाव बना रहा, हालांकि व्यापक बाजार ने मजबूती दिखाई और मिडकैप इंडेक्स कुछ समय के लिए अपने सर्वकालिक उच्च स्तर (ऑल-टाइम हाई) तक पहुंच गया।
एक विश्लेषक ने कहा कि सरकारी बैंकों (पीएसयू बैंक्स) को बॉन्ड यील्ड में गिरावट से हुए मार्क-टू-मार्केट ट्रेजरी लाभ का फायदा मिला। वहीं कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट से ऑटो और मेटल सेक्टर को भी सपोर्ट मिला। दूसरी ओर एफएमसीजी, हेल्थकेयर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में गिरावट देखने को मिली क्योंकि निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ने से डिफेंसिव शेयरों का आकर्षण कम हुआ।
विश्लेषकों के अनुसार, एमएससीआई इंडेक्स रीबैलेंसिंग से जुड़े बदलावों के कारण भी सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में संस्थागत निवेशकों की ओर से बड़ी बिकवाली देखने को मिली।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि दो सप्ताह पहले की तुलना में व्यापक आर्थिक माहौल अब बेहतर दिख रहा है, लेकिन बड़े शेयरों में मजबूत निवेश रुझान बनने के लिए नीतिगत स्पष्टता, सामान्य मानसून और भू-राजनीतिक तनाव में कमी की पुष्टि जरूरी होगी।
इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिसकी मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक समझौते को लेकर बढ़ी उम्मीदें रहीं। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के सामान्य से कम मानसून के अनुमान ने बाजार की सकारात्मकता को सीमित कर दिया।
इस दौरान भारतीय रुपया भी कुछ मजबूत हुआ, जिसकी वजह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की वह टिप्पणी रही, जिसमें संकेत दिया गया कि रुपया अभी भी अपने वास्तविक मूल्य से कम आंका गया है।
विश्लेषकों के मुताबिक, सप्ताह के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने करीब 23,700 करोड़ रुपए की शुद्ध बिकवाली की।
बेंचमार्क सूचकांकों के विपरीत व्यापक बाजार में मजबूती देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में सप्ताह के दौरान 0.54 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1.02 प्रतिशत चढ़ा।
बाजार सहभागियों का मानना है कि निफ्टी 50 के लिए 24,000-24,100 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस (प्रतिरोध) क्षेत्र रहेगा, जबकि 23,300-23,000 का दायरा महत्वपूर्ण सपोर्ट (समर्थन) जोन बना रहेगा।
बैंक निफ्टी में 54,600-54,800 का स्तर निकटतम रेजिस्टेंस माना जा रहा है, जबकि 54,200-54,000 का स्तर तत्काल सपोर्ट जोन के रूप में काम करेगा।
निवेशकों की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक नीति (मोनेटरी पॉलिसी), भारत के जीडीपी आंकड़ों, परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़ों पर बनी हुई है, जो बाजार की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
–केसरिया न्यूज़
