आंध्र प्रदेश: पवन कल्याण ने गोदावरी नदी में गिर रहे प्रदूषकों का ऑडिट कराने का दिया आदेश


अमरावती, 25 मई (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने सोमवार को अधिकारियों को गोदावरी नदी में बहने वाले प्रदूषण फैलाने वाले कचरे और अपशिष्ट जल का व्यापक ऑडिट करने तथा उनके मौजूदा प्रबंधन प्रोटोकॉल की समीक्षा करने का निर्देश दिया।

गोदावरी नदी के प्रदूषण से प्रभावित हिस्सों का दौरा करने के बाद उन्होंने पूर्वी गोदावरी जिले के अधिकारियों से एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा। इस रिपोर्ट में अब तक उठाए गए कदमों और आगे किए जाने वाले कामों की एक स्पष्ट और ठोस योजना का ब्योरा होना चाहिए।

पवन कल्याण के पास पर्यावरण विभाग का प्रभार है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गठबंधन सरकार अगले साल होने वाले गोदावरी पुष्करम को ‘प्रदूषण-मुक्त गोदावरी’ की मुख्य थीम के तहत आयोजित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

राजमहेन्द्रवरम के अपने दौरे पर पवन कल्याण ने सोमवार सुबह 6 बजे नाव से यात्रा शुरू की। उन्होंने राजमहेन्द्रवरम पुष्कर घाट से कोटिलिंगला घाट तक का सफर किया, ताकि वे गोदावरी नदी के उन हिस्सों का खुद जाकर मुआयना कर सकें जो प्रदूषण से प्रभावित हैं।

उन्होंने पुष्करम के लिए चल रहे कामों की प्रगति की समीक्षा भी की। साथ ही उन कामों की योजनाओं पर भी चर्चा की जिन्हें जल्द ही शुरू किया जाना है। अधिकारियों ने उन्हें गोदावरी नदी के किनारों पर चल रहे सौंदर्यीकरण के कामों की प्रगति के बारे में जानकारी दी।

चिंतालम्मा घाट पर पवन कल्याण ने उस जगह का खुद मुआयना किया, जहां राजमहेन्द्रवरम का सीवेज (गंदा पानी) ‘नल्ला चैनल’ के रास्ते गोदावरी नदी में गिरता है।

उन्होंने नदी के किनारे प्रदूषण की स्थिति को अपनी आंखों से देखा। उन्होंने पानी के शुद्धिकरण के लिए अपनाए जा रहे तरीकों के बारे में भी विस्तार से जानकारी हासिल की। उन्होंने वहां मौजूद कर्मचारियों से बातचीत भी की और कचरा अलग करने की प्रक्रिया का भी जायजा लिया।

उन्होंने कहा कि आंकड़ों के मुताबिक हर दिन लगभग 55 मिलियन लीटर प्रतिदिन सीवेज गोदावरी नदी में गिरता है। इस सीवेज के शुद्धिकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह से वैज्ञानिक और सही तरीके से किया जाना चाहिए। हमें ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि बिना शुद्ध किए हुए सीवेज को सीधे गोदावरी नदी में छोड़ने की वजह से नदी का पानी दूषित हो रहा है। हमें इस मुद्दे पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करना होगा।

उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण के स्रोतों के बारे में एक विस्तृत ऑडिट (जांच) किया जाना चाहिए, ताकि बाद में इन समस्याओं को कम करने की रणनीतियों पर बेहतर तरीके से काम किया जा सके।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना के तहत केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आवंटित 416 करोड़ रुपए में से 95 करोड़ रुपए के लिए प्रशासनिक मंजूरी मिल गई है।

उन्होंने कहा कि इन पैसों का इस्तेमाल आधुनिक तकनीक से लैस नए ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के लिए किया जाना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करने की पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी कि गोदावरी नदी में केवल पूरी तरह से शुद्ध किया हुआ पानी ही छोड़ा जाए। ऐसा पानी जो किसी भी तरह के सीवेज से पूरी तरह मुक्त हो।

–आईएएनएस

डीकेएम/वीसी


Related Articles

Latest News