संयुक्त राष्ट्र, 23 मई (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता अधिकारियों ने कहा है कि संघर्ष, हिंसा और असुरक्षा के बीच नाइजीरिया में लाखों लोग अब तक के सबसे गंभीर खाद्य संकट वाले मौसमों में से एक का सामना करने की तैयारी कर रहे हैं।
यूनाइटेड नेशंस ऑफिस फॉर द कोआर्डिनेशन ऑफ ह्यूमेनट्रियन अफेयर्स (ओसीएचए) ने कहा कि आर्थिक दबाव और अभूतपूर्व वित्तीय कमी नाइजीरियाई परिवारों को गंभीर संकट की स्थिति में धकेल रहे हैं।
नाइजीरिया में संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायता टीम ने बताया कि देशभर में लगभग हर सात में से एक व्यक्ति, यानी करीब 3.5 करोड़ लोग, जून से अगस्त तक चलने वाले इस वर्ष के कठिन खाद्य संकट मौसम के दौरान गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर सकते हैं।
ओसीएचए ने कहा, “इससे नाइजीरिया दुनिया के सबसे बड़े भूख संकटों में से एक बन गया है, जिसका सबसे अधिक असर उत्तरी नाइजीरिया पर पड़ रहा है। यदि सहायता में और देरी हुई, तो लाखों परिवारों को भोजन कम करना पड़ेगा, अपनी संपत्तियां बेचनी पड़ेंगी और बच्चों को स्कूल से निकालना पड़ेगा।”
ओसीएचए ने यह भी कहा कि तीव्र कुपोषण के मामलों में भी भारी वृद्धि होने की आशंका है, जिससे लाखों बच्चों की जान खतरे में पड़ सकती है। समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी नाइजीरिया में इस वर्ष लगभग 64 लाख बच्चों के गंभीर कुपोषण का शिकार होने की संभावना है।
संयुक्त राष्ट्र और उसके मानवीय सहयोगियों ने जीवन रक्षक सहायता बढ़ाने के लिए तत्काल वित्तीय सहायता की अपील की है।
ओसीएचए ने कहा, “नाइजीरिया ह्यूमैनिटेरियन फंड से मिले संसाधनों ने राहत कार्य शुरू करने में मदद की है, लेकिन तत्काल मानवीय जरूरतों को पूरा करने के लिए और सहायता की आवश्यकता है।” संगठन ने बताया कि 51.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर की मानवीय सहायता योजना में अब तक केवल 40 प्रतिशत से थोड़ा अधिक, यानी 21.5 करोड़ डॉलर ही प्राप्त हुए हैं।
इस महीने की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफ्रीकी देशों को प्रभावित कर रहे संघर्षों और जलवायु संकटों से निपटने के लिए तेजी से कदम उठाने का आग्रह किया था।
गुटेरेस ने कहा कि संघर्ष, जलवायु आपदाएं और वैश्विक बहुपक्षीय व्यवस्था में असंतुलन अफ्रीका के शांतिपूर्ण और समृद्ध भविष्य के रास्ते में बड़ी बाधा बन रहे हैं।
केन्या की राजधानी नैरोबी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, “अफ्रीका के भविष्य पर कोई भी चर्चा महाद्वीप में चल रहे संघर्षों से होने वाली पीड़ा को नजरअंदाज नहीं कर सकती।” उन्होंने सूडान, पूर्वी कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और दक्षिण सूडान में तत्काल युद्धविराम की मांग की।
गुटेरेस ने चेतावनी दी कि आतंकवाद, जलवायु दबाव, भूख और गरीबी साहेल क्षेत्र को तबाह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्थायी शांति के लिए संवाद, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मजबूत स्थानीय संस्थाएं जरूरी हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि मध्य पूर्व में संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना अफ्रीका की स्थिरता के लिए सीधा खतरा है, क्योंकि अफ्रीका के 13 प्रतिशत आयात- मुख्य रूप से तेल और उर्वरक इसी महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से होकर गुजरते हैं।
गुटेरेस ने कहा कि अफ्रीका के हर पांच में से चार देश तेल के शुद्ध आयातक हैं और यदि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में लंबे समय तक बाधा बनी रही तो उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो जाएगी।
उन्होंने कहा, “इसीलिए तनाव कम करना बेहद जरूरी है। समुद्री आवाजाही के अधिकार और स्वतंत्रता बहाल होनी चाहिए। होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह और सुरक्षित रूप से फिर से खोला जाना चाहिए। सभी पक्षों को ऐसे किसी भी कदम से बचना चाहिए जिससे संघर्ष और बढ़े, और कूटनीति को पूरा मौका दिया जाना चाहिए।”
गुटेरेस ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में बढ़ती अस्थिरता के बीच संयुक्त राष्ट्र अफ्रीका के साथ अपनी भागीदारी को और मजबूत कर रहा है, ताकि शांति, सतत विकास और जलवायु न्याय को बढ़ावा दिया जा सके।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अफ्रीका को स्थायी सदस्यता न मिलने की आलोचना करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र एक अधिक न्यायसंगत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए प्रयास जारी रखेगा, जिसमें अफ्रीका को अधिक प्रतिनिधित्व, संसाधन और मजबूत आवाज मिल सके।
–आईएएनएस
पीएम
