उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने मंगलवार को कहा कि दुनिया के कई हिस्से जहां युद्ध, संघर्ष और सांस्कृतिक विरासतों के विनाश की त्रासदी झेल रहे हैं, वहीं भारत अपनी समृद्ध धरोहरों को सहेजकर विश्व के सामने सांस्कृतिक संरक्षण का सकारात्मक और प्रेरणादायक मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर लखनऊ स्थित राज्य संग्रहालय में आयोजित एक कार्यक्रम में जयवीर सिंह ने पाश्चात्य मूर्तिकला वीथिका का लोकार्पण, ‘संग्रहालय पुरातत्व पत्रिका-2026’ का विमोचन तथा ‘आदियोगी शिव: ए जर्नी इन कॉस्मिक इंडिगो’ टेक्सटाइल प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होने कहा कि संग्रहालय केवल प्राचीन वस्तुओं को संरक्षित रखने का केंद्र नहीं है, बल्कि देश की सभ्यता, संस्कृति और इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में युवाओं का अपनी जड़ों और विरासत से जुड़ना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से सरकार संग्रहालयों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के साथ-साथ बच्चों और युवाओं के लिए अधिक सरल, आकर्षक और इंटरैक्टिव बना रही है। उन्होंने बताया कि छुट्टी के दिनों में संग्रहालयों में नि:शुल्क प्रवेश की व्यवस्था की गई है, ताकि अधिक से अधिक लोग यहां आकर अपनी संस्कृति को करीब से जान सकें।
पर्यटन मंत्री ने इस अवसर पर ‘विजिट माय स्टेट’ अभियान का भी उल्लेख किया, जिसके माध्यम से लोगों को अपने ही प्रदेश की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन धरोहरों को देखने और समझने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने प्रतियोगिताओं में विजयी विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध कलाकार संगीता गुप्ता ने ‘आदियोगी शिव: ए जर्नी इन कॉस्मिक इंडिगो’ प्रदर्शनी के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि नील यानी इंडिगो का भारतीय इतिहास और महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन से गहरा संबंध रहा है।
उन्होंने बताया कि भगवान शिव के स्वरूप में स्त्री और पुरुष दोनों ऊर्जा का अद्भुत संतुलन दिखाई देता है। इसी अवधारणा को ध्यान में रखते हुए खादी के वस्त्रों पर नील रंग से आदि शंकराचार्य रचित ‘अर्धनारीश्वर स्तोत्र’ को रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह विशेष टेक्सटाइल प्रदर्शनी 19 मई से 19 जून 2026 तक राज्य संग्रहालय की अस्थाई वीथिका में आम लोगों के लिए लगाई गई है।
