आईडब्ल्यूटी को लेकर पाकिस्तान कर रहा झूठे दावे, भारत पर फोड़ रहा अपनी गलतियों का ठीकरा: रिपोर्ट

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इस्लामाबाद/नई दिल्ली, 19 मई (आईएएनएस)। पहलगाम आतंकी हमले के बाद सख्त और स्पष्ट रवैया अपनाते हुए भारत ने सिंधू जल संधि (आईडब्ल्यूटी) को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया था। इसके बावजूद भारत ने पश्चिमी नदियों का पानी नहीं रोका।

इसके अलावा, भारत की तरफ से पूर्वी नदियों के पानी में भी करीब 5 से 6 प्रतिशत हिस्सा तकनीकी और भंडारण सीमाओं के कारण पाकिस्तान की ओर बहता रहता है।

यूरेशिया रिव्यू की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान इस मुद्दे को लेकर “गलत दावे” कर रहा है और अपनी गलती का ठीकरा भारत पर फोड़ने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, असल स्थिति इसके उलट है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय जल संसाधन निगरानी करने वाली संस्थाओं ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर पाकिस्तान अपनी जल प्रबंधन व्यवस्था में सुधार नहीं करता है तो 2025 तक उसे गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ेगा।

यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान अपनी बहुत सीमित जल भंडारण क्षमता (लगभग 30 दिन) को भी बढ़ाने में असफल रहा है, जो उसकी सबसे बड़ी समस्या है।

इस मुद्दे को लेकर पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भी शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें भारत के फैसले को “शांति और मानवता के लिए खतरा” बताया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समर्थन पाने के लिए पाकिस्तान ने यह दावा भी किया कि देश में केवल 90 दिनों का ही पानी बचा है।

हालांकि, रिपोर्ट ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर स्थिति इतनी गंभीर होती, तो यह पत्र पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की बजाय उप प्रधानमंत्री ने क्यों भेजा?

रिपोर्ट में पाकिस्तान के पूर्व मौसम विभाग प्रमुख कमर-उज-जमान के हवाले से कहा गया कि पाकिस्तान अपनी कृषि में उपयोग होने वाले पानी का लगभग दो-तिहाई हिस्सा पुराने और बेकार तरीकों के कारण बर्बाद कर देता है।

इसके अलावा, पाकिस्तान अपने कुल वार्षिक जल प्रवाह का लगभग 10 प्रतिशत ही संग्रहित कर पाता है, जबकि वैश्विक औसत करीब 40 प्रतिशत है। उसकी इंडस बेसिन सिंचाई प्रणाली में भी लगभग 25 प्रतिशत पानी रिसाव और खराब प्रबंधन के कारण बर्बाद हो जाता है।

पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी जमील मुहम्मद ने भी चेतावनी दी कि पाकिस्तान के पास पानी पूरी तरह खत्म तो नहीं है, लेकिन गलत प्रबंधन के कारण भविष्य में स्थिति गंभीर हो सकती है, खासकर बढ़ती जरूरतों को देखते हुए।

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