पीएम मोदी के विजन देश के शैक्षणिक संस्थान एक्सीलेंस और इनोवेशन का हब बने : भूपेंद्र पटेल


गांधीनगर, 17 मई (आईएएनएस)। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने रविवार को गांधीनगर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, इनोवेशन और इनक्यूबेशन सेंटर के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशिष्ट विजन से देश के शैक्षणिक संस्थान एक्सीलेंस और इनोवेशन का हब बन गए।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि यह स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम अब एक रिवॉल्यूशन बन गया है। एक दशक पहले देश में 500 से कम स्टार्टअप थे जबकि आज लगभग 2 लाख स्टार्टअप कार्यरत हैं। गुजरात सरकार युवा शक्ति के टैलेंट, इनोवेशन और क्रिएटिविटी को बढ़ावा देने के लिए कटिबद्ध है। गुजरातियों के लिए तो कहा भी जाता है कि हमारे डीएनए में ही व्यापार-उद्यमिता है। गुजरात में करीब 16,000 स्टार्टअप कार्यरत हैं। इसके परिणामस्वरूप राज्य को बेस्ट परफॉर्मिंग स्टेट का अवार्ड मिला है।

पीएम मोदी का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि पीएम मोदी के विजन में डिजाइन केवल एक विषय ही नहीं है बल्कि मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत जैसी पहलों का एक अमूल्य अंग है। 21वीं सदी में, क्रिएटिविटी, इनोवेशन और डिजाइन के बिना कोई भी राष्ट्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे नहीं बढ़ सकता है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि विश्वनेता और पीएम मोदी के विशिष्ट विजन से देश के शैक्षणिक संस्थान एक्सीलेंस और इनोवेशन का हब बन गए हैं। प्रधानमंत्री का यह स्पष्ट मानना है कि यदि हम बदलते समय से एक कदम आगे चलें, तभी हम वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिक सकते हैं। यहां मैं इस बात का विशेष रूप से उल्लेख करना चाहूंगा कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभालने के बाद संसद द्वारा पारित किया गया सबसे पहला बिल नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन एक्ट 2014 था। इस ऐतिहासिक बिल से एनआईडी को इंस्टिट्यूट ऑफ नेशनल इंपोर्टेंस का दर्जा मिला।

वहीं, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने जनगणना-2027 के अनुरूप, जनसंख्या गणना प्लेटफॉर्म पर स्वयं और अपने परिवार का विवरण भरकर, राज्यव्यापी ‘स्व-गणना’ प्रक्रिया की शुरुआत की है।

मुख्यमंत्री ने राज्य के नागरिकों से आग्रह किया है कि वे आज से लेकर 31 मई तक निर्धारित 15 दिनों की अवधि के भीतर अपनी स्व-गणना करके, इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य में सक्रिय रूप से भाग लें और एक सशक्त, समावेशी और विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दें। यहां यह उल्लेखनीय है कि ‘जनसंख्या गणना-2027’ पूरी तरह से डिजिटल माध्यम से एक पोर्टल और मोबाइल-आधारित प्रणाली के जरिए संपन्न की जा रही है।

–आईएएनएस

डीकेएम/पीएम


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