भारत और म्यांमार के बीच यूएन शांति मिशन का 9वां प्रशिक्षण कोर्स शुरू


नेपीडॉ, 11 मई (आईएएनएस)। नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर यूनाइटेड नेशंस पीसकीपिंग (सीयूएनपीके) ने म्यांमार के 30 अधिकारियों के लिए संयुक्त राष्ट्र (यूएन) शांति मिशन पर दो हफ्ते का कोर्स शुरू किया है। यह जानकारी भारत के म्यांमार स्थित दूतावास ने सोमवार को दी।

यह भारत और म्यांमार के बीच यूएन शांति मिशन पर चल रहा 9वां प्रशिक्षण कोर्स है। इस कोर्स को सीयूएनपीके की तीन सदस्यीय ट्रेनिंग टीम नेपीडॉ (म्यांमार की राजधानी) में करा रही है।

राजदूत अभय ठाकुर ने बताया कि भारत मानवीय मिशनों में कितना योगदान देता है और इससे दुनिया में स्थिरता कैसे बनी रहती है।

पिछले साल जुलाई में 8वां प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ था। उससे पहले 2016 से 2019 के बीच सात सफल कोर्स भी किए जा चुके हैं।

राजदूत ने कहा, “म्यांमार और भारत के बीच एक खास और गहरा रिश्ता है, जो सदियों पुराने इतिहास, सांस्कृतिक जुड़ाव और भौगोलिक नजदीकी से जुड़ा हुआ है।”

उन्होंने कहा कि म्यांमार भारत की तीन बड़ी विदेश नीति प्राथमिकताओं ‘नेबरहुड फर्स्ट’, ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘इंडो-पैसिफिक’ के केंद्र में है। यह रिश्ता सिर्फ रणनीतिक नहीं है, बल्कि यह हमारे साझा भविष्य और एक जैसी किस्मत का भी प्रतीक है।

उन्होंने यह भी बताया कि इस कोर्स का पाठ्यक्रम बहुत सोच-समझकर तैयार किया गया है, जिससे म्यांमार के अधिकारियों की समझ और तैयारी मजबूत हो सके।

राजदूत के मुताबिक, इस ट्रेनिंग में धीरे-धीरे बढ़ने और टकराव का मैनेजमेंट शामिल है, जो शांति सैनिकों को तनाव कम करने और अस्थिर माहौल में झगड़ों को असरदार तरीके से मैनेज करने के लिए स्किल्स से लैस करेगा।

यह आम लोगों की सुरक्षा और जुड़ाव के नियम भी सिखाता है, जो अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने और आम लोगों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के सबसे जरूरी महत्व को मजबूत करता है, जो शांति स्थापना का असली मतलब है।

मुश्किल शांति स्थापना के माहौल में ऑपरेशनल प्लानिंग भी करिकुलम में शामिल है, जो अलग-अलग और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशनल थिएटर में मिशन की असरदार प्लानिंग और उसे पूरा करने के लिए प्रैक्टिकल जानकारी और तरीके देता है।

राजदूत ने बताया कि 1950 से भारत दुनिया में शांति और सुरक्षा के लिए लगातार योगदान दे रहा है। अब तक 2,90,000 से ज्यादा भारतीय शांति सैनिक 50 से ज्यादा यूएन मिशनों में काम कर चुके हैं।

उन्होंने कहा, “भारत अपने शांति मिशन के लंबे और महत्वपूर्ण अनुभव को साझा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसे बहुत सम्मान की बात मानता है।”

सीयूएनपीके को विदेश मंत्रालय (एमईए), रक्षा मंत्रालय और भारतीय सशस्त्र बलों की एक संयुक्त पहल के रूप में स्थापित किया गया है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत न सिर्फ बड़ी संख्या में सैनिक भेजने वाला देश है, बल्कि यूएन शांति मिशन से जुड़े विचार-विमर्श में भी सक्रिय भूमिका निभाता है और कई अहम अवधारणाओं को आकार देने में मदद करता है।

–आईएएनएस

एवाई/एबीएम


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