हंतावायरस से प्रभावित जहाज पर सवार सभी लोग 'हाई-रिस्क' कॉन्टैक्ट : डब्ल्यूएचओ


जिनेवा, 10 मई (आईएएनएस)। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि जिस क्रूज जहाज पर हंतावायरस फैलने का मामला सामने आया है, उसमें सवार सभी लोगों को “उच्च जोखिम” वाला संपर्क माना जाना चाहिए। इसलिए उन सभी की 42 दिनों तक लगातार निगरानी की जानी चाहिए।

डब्ल्यूएचओ में महामारी और रोकथाम विभाग की निदेशक मारिया वैन केरखोव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जहाज पर मौजूद हर व्यक्ति को हाई-रिस्क कॉन्टैक्ट माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि फिलहाल जहाज पर किसी में भी बीमारी के लक्षण नहीं दिखे हैं, लेकिन फिर भी जहाज से उतरने वाले सभी यात्रियों और कर्मचारियों की 42 दिनों तक निगरानी और स्वास्थ्य जांच जरूरी है।

हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि आम लोगों और स्पेन के कैनरी आइलैंड्स के लोगों के लिए खतरा अभी कम है। यह जहाज रविवार को वहां पहुंचने वाला है।

शनिवार को डब्ल्यूएचओ के ‘डिजीज आउटब्रेक न्यूज़’ अपडेट के अनुसार, इस क्रूज जहाज पर 2 मई को पहली बार गंभीर सांस संबंधी बीमारी के मामले सामने आए थे। उस समय जहाज पर 147 यात्री और कर्मचारी मौजूद थे, जबकि 34 लोग पहले ही जहाज से उतर चुके थे। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित देशों में डब्ल्यूएचओ के सभी संपर्क बिंदुओं को सूचित कर दिया गया है। सभी देश मिलकर उन लोगों का पता लगाने और उनकी जांच करने का काम कर रहे हैं, जो संक्रमित लोगों के संपर्क में आए हो सकते हैं।

8 मई तक कुल आठ लोगों में बीमारी के लक्षण पाए गए हैं। इनमें तीन लोगों की मौत हो चुकी है। छह मामलों में जांच के बाद एंडीज वायरस (एएनडीवी) हंतावायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है। डब्ल्यूएचओ ने संबंधित देशों से कहा है कि वे आपसी तालमेल बनाए रखें और संक्रमित लोगों की पहचान, इलाज, संक्रमण रोकने के उपाय और लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने का काम जारी रखें।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, हंतावायरस संक्रमण के शुरुआती लक्षणों में सिरदर्द, चक्कर आना, ठंड लगना, बुखार, मांसपेशियों में दर्द और पेट संबंधी समस्याएं शामिल हैं। इनमें मतली, उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा कि पहले के कुछ मामलों में लक्षण आने से पहले भी संक्रमण फैलने की आशंका को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। इसलिए कम जोखिम वाले लोगों को भी अपनी सेहत पर नजर रखने, जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से जांच कराने और लक्षण दिखने पर मास्क पहनने की सलाह दी गई है।

–आईएएनएस

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