ममता बनर्जी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में गतिरोध पैदा कर रही हैं: उज्जवल निकम


नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने मंगलवार को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि मैं मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दूंगी। हम जनादेश से नहीं, बल्कि साजिश से हारे हैं, इसलिए इस्तीफा देने राजभवन नहीं जाऊंगी। ममता बनर्जी के इस बयान के बाद सियासत तेज हो गई है।

भाजपा सांसद और अधिवक्ता उज्जवल निकम ने कहा, “हमारे देश में यह पहली बार है कि चुनाव हारने के बाद कोई मुख्यमंत्री पद छोड़ने से इनकार कर रहा है। यह स्पष्ट रूप से एक गतिरोध पैदा करने का प्रयास है, जिसका कोई कानूनी आधार नहीं है।”

सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी दुबे ने कहा, “भारत का संविधान स्पष्ट करता है कि यदि कोई पार्टी विधानसभा चुनाव हार जाती है तो स्थापित प्रथा के अनुसार, मौजूदा मुख्यमंत्री राज्यपाल के पास जाकर इस्तीफा देते हैं। उसके बाद, नई विधानसभा के गठन तक, राज्यपाल कार्यवाहक विधानसभा की व्यवस्था सुनिश्चित करते हैं। पश्चिम बंगाल में मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है, और नई विधानसभा का गठन 8 मई को होगा। इसके बाद एक नए मंत्रिमंडल का गठन किया जाएगा।”

ममता बनर्जी के इस्तीफे को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए अधिवक्ता विराग गुप्ता ने कहा कि अगर वह व्यक्तिगत रूप से इस्तीफा नहीं देती हैं तो इससे संवैधानिक संकट उत्पन्न नहीं होगा, क्योंकि इस्तीफा लिखित रूप में भी दिया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि पत्र या ईमेल के माध्यम से भेजा गया इस्तीफा भी वैध होगा, यदि सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है और इसका पूर्ण संवैधानिक प्रभाव होगा।

उन्होंने ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने पर कहा, “इसके दो पहलू हैं। संविधान का अनुच्छेद 172 यह प्रावधान करता है कि विधानसभा का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। आपातकाल में राष्ट्रपति के अनुमोदन पर एक साल के लिए बढ़ाया जा सकता है, लेकिन जब चुनाव हो जाता है तो नई विधानसभा का गठन होगा और नया मुख्यमंत्री भी होगा।”

भाजपा से राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने ममता बनर्जी द्वारा हार के लिए चुनाव आयोग को दोषी ठहराने वाली टिप्पणी पर कहा कि ऐसे बयान परिणाम आने के बाद जिम्मेदारी दूसरों पर डालने का प्रयास हैं। भवानीपुर में सुवेंदु अधिकारी द्वारा ममता बनर्जी को 15,000 से अधिक वोटों से हराने पर उन्होंने इसे पश्चिम बंगाल की जनता का स्पष्ट जनादेश बताया।

पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रवक्ता देबजीत सरकार ने कहा, “ममता बनर्जी जाने से पहले वह तमाशा कर रही हैं। उनके इस्तीफा न देने से कुछ नहीं होगा।

भाजपा की विजयी उम्मीदवार रूपा गांगुली ने कहा, “क्या यह संभव है? अगर आप हारती हैं तो आपको हार स्वीकार करनी होगी। ठीक है, इन सबको देखने के लिए राज्यपाल, चुनाव आयोग और देश का संविधान है।”

त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय ने कहा, “अगर ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देती हैं तो इससे किसी को क्या फर्क पड़ता है? 8 मई को विधानसभा सत्र तो वैसे भी समाप्त हो जाएगा। उसके बाद वह क्या करेंगी? वह बस सड़कों पर बैठ जाएंगी।”

–आईएएनएस

ओपी/डीकेपी


Related Articles

Latest News