बदलती जीवनशैली, असंतुलित खान-पान और आरामतलबी के कारण दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित सिस्टम, आने वाले समय में हृदय रोगों के इलाज को नई दिशा देंगे।यह जानकारी डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में कार्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. भुवन चन्द्र तिवारी ने साझा की। वह एसोसिएशन ऑफ कार्डियक टेक्नोलॉजिस्ट (एओसीटी) की ओर से सोमवार को कानपुर रोड स्थित होटल में आयोजित कार्डियोवैस्कुलर टेक्नोलॉजिस्ट कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. भुवन ने बताया कि एआई आधारित कार्डियक इमेजिंग और डिजिटल कैथलैब सिस्टम इलाज की गुणवत्ता और सटीकता को नई ऊंचाई देंगे। इससे डॉक्टरों के साथ-साथ टेक्नोलॉजिस्ट और नर्सिंग स्टाफ की कार्यक्षमता भी बढ़ेगी। कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश से करीब 400 विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम में आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की गई।
ऑर्गनाइजिंग वाइस प्रेसिडेंट एवं लोहिया संस्थान के कार्डियक टेक्नोलॉजिस्ट प्रियरंजन पांडेय ने बताया कि एआई की मदद से दिल की धमनियों में ब्लॉकेज, रक्त प्रवाह और ऊतकों की स्थिति का बेहद सटीक आकलन संभव हो गया है। एआई एल्गोरिद्म मरीज के डेटा का विश्लेषण कर संभावित जोखिमों का पहले ही संकेत दे देते हैं, जिससे समय रहते इलाज संभव हो पाता है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल कैथलैब सिस्टम से प्रक्रिया के दौरान मानव त्रुटि की संभावना कम हो जाती है। हाई-रिजॉल्यूशन इमेजिंग, रियल-टाइम डेटा एनालिसिस और ऑटोमेटेड रिपोर्टिंग जैसी सुविधाएं इलाज को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बना रही हैं। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के लारी कार्डियोलॉजी विभाग के डॉ. शरद चन्द्रा ने कहा कि इस तरह के वैज्ञानिक कार्यक्रम नए टेक्नोलॉजिस्ट और नर्सिंग स्टाफ के लिए सीखने का बेहतर अवसर हैं। इससे उनके तकनीकी कौशल और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
