नाइजीरिया को पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यातक बनाने में भारत ने निभाई अहम भूमिका : रिपोर्ट

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नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण हॉर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से तेल से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित हो गई हैं और इस बीच तट के किनारे मौजूद अपनी रिफाइनरी के कारण नाइजीरिया पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यातक बनकर उभरा है, जिसे चीन और भारत की सहायता से बनाया गया है। यह जानकारी एक नई रिपोर्ट में दी गई।

न्यूज पोर्टल बिजनेस इनसाइडर अफ्रीका के एक आर्टिकल के अनुसार, अफ्रीका के सबसे धनी व्यक्ति अलीको डांगोटे के स्वामित्व वाली लागोस स्थित रिफाइनरी प्रतिदिन 650,000 बैरल की पूरी क्षमता से काम कर रही है और पश्चिम, मध्य और पूर्वी अफ्रीका में ईंधन की आपूर्ति कर रही है।

आर्टिकल में कहा गया है कि इस रिफाइनरी के उत्पाद सेनेगल से मोजाम्बिक तक के बाजारों में पहुंच चुके हैं और अतिरिक्त खेप यूरोप, जिसमें नीदरलैंड और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं, साथ ही एशिया के कुछ हिस्सों तक भी पहुंच रही है।

आर्टिकल में बताया गया है, “रिफाइनरी का निर्माण चीनी औद्योगिक क्षमता और भारतीय इंजीनियरिंग अनोखे के संयोजन को दर्शाता है, जो पश्चिमी ठेकेदारों से जुड़ी आमतौर पर लंबी समय-सीमा की तुलना में डिलीवरी की गति और परियोजना के पैमाने दोनों को आधार प्रदान करता है।”

परियोजना की शुरुआत से ही आठ से अधिक चीनी कंपनियां इसमें शामिल रही हैं, जिन्होंने औद्योगिक आधार प्रदान किया जिससे बड़े पैमाने पर काम पूरा हो सका।

भारत की भूमिका इंजीनियरिंग प्रबंधन और परियोजना की निरंतरता पर केंद्रित रही है। आर्टिकल में बताया गया है कि जनवरी में, डांगोटे समूह ने रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल्स कॉम्प्लेक्स के विस्तार में सहयोग के लिए इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) के साथ 35 करोड़ डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू किया है।

ईआईएल परियोजना प्रबंधन सलाहकार और इंजीनियरिंग, खरीद एवं निर्माण प्रबंधन सलाहकार के रूप में कार्य करेगी, जो 2024 में शुरू हुए प्रारंभिक चरण में उसकी भूमिका के समान है। निर्माण के चरम पर, इस परियोजना में 30,000 से अधिक नाइजीरियाई श्रमिकों के साथ-साथ 6,400 भारतीय और 3,250 चीनी श्रमिक कार्यरत थे, जो रिफाइनरी के विशाल आकार और तकनीकी आवश्यकताओं को दर्शाता है।

आर्टिकल में आगे कहा गया है कि लगभग 11,000 प्रशिक्षित भारतीय श्रमिकों को भी काम पर लगाया गया था, जिस पर क्षेत्रीय हितधारकों ने सवाल उठाए थे, हालांकि कंपनी का कहना था कि रिफाइनरी की जटिलता के लिए वैश्विक विशेषज्ञता की आवश्यकता है।

इसमें बताया गया है कि 2016 और 2018 के बीच, समूह ने नाइजीरियाई स्नातकों को मुंबई स्थित भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड में रिफाइनरी संचालन, रखरखाव और उत्पादन में प्रशिक्षण के लिए भेजा, ताकि रिफाइनरी के चालू होने से पहले स्थानीय तकनीकी क्षमता का निर्माण किया जा सके। इस कार्यक्रम में लगभग 800 नाइजीरियाई नागरिकों को शामिल किया गया, जिन्हें 24 महीनों की अवधि में 50-50 के बैचों में प्रशिक्षित किया गया। इस प्रशिक्षण से उन्हें भारत में बड़े पैमाने पर रिफाइनिंग प्रणालियों का अनुभव प्राप्त हुआ, जहां जामनगर रिफाइनरी स्थित है, जो विश्व का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स है।

आर्टिकल में कहा गया है, “विशेष रूप से, भारतीय इंजीनियर देवकुमार वी. जी. एडविन, जिन्होंने डांगोटे इंडस्ट्रीज में तेल और गैस के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया, ने रिफाइनरी के तकनीकी विकास और परिचालन की शुरुआत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।”

आर्टिकल में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि रिफाइनरी का प्रभाव व्यापार प्रवाह में दिखना शुरू हो गया है, जिसके चलते नाइजीरिया मार्च में पहली बार परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का शुद्ध निर्यातक बन गया है, जिससे दशकों की आयात निर्भरता उलट गई है।

–आईएएनएस

एबीएस/

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