सीनेटर वार्नॉक ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना की, बताया मतदान अधिकारों पर बड़ा झटका


वॉशिंगटन, 3 मई (आईएएनएस)। डेमोक्रेटिक सीनेटर राफेल वार्नॉक ने रविवार को अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के मतदान अधिकारों से जुड़े फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह फैसला लोकतंत्र पर ‘बहुत बड़ा और विनाशकारी झटका’ है और इससे खासकर अश्वेत मतदाताओं को नुकसान हो सकता है।

सीबीएस न्यूज को दिए इंटरव्यू में वार्नॉक ने कहा, ”इस हफ्ते जो हुआ वह हमारे लोकतंत्र के लिए ही नहीं, बल्कि खासकर दक्षिण अमेरिका में रहने वाले रंगभेद के शिकार लोगों के लिए एक बहुत बड़ा और विनाशकारी झटका है।”

यह फैसला मतदान अधिकार कानून की धारा 2 के इस्तेमाल को सीमित करता है, जिससे अब नस्लीय भेदभाव के आधार पर चुनावी नक्शों को चुनौती देना मुश्किल हो जाएगा, जब तक कि जानबूझकर भेदभाव साबित न हो। वार्नॉक ने कहा कि यह मानक गलत है और यह इतिहास की सच्चाई को नजरअंदाज करता है।

उन्होंने बताया कि वर्षों तक अफ्रीकी-अमेरिकियों को मतदान के अधिकार से वंचित किया गया, भले ही कानूनों में यह सीधे तौर पर लिखा न हो।

वार्नॉक ने इस फैसले को 2013 के शेल्बी काउंटी बनाम होल्डर मामले से भी जोड़ा, जिसने पहले ही मतदान कानूनों पर संघीय निगरानी को कमजोर कर दिया था।

उन्होंने कहा, ”तब से हमने देखा है कि नस्लीय मतदान अंतर और बढ़ा है, कम नहीं हुआ।” उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में पहले सख्त निगरानी थी, वहां यह अंतर और तेजी से बढ़ा है।

उन्होंने चेतावनी दी कि नया फैसला इन रुझानों को और खराब करेगा और राज्यों को इस तरह चुनावी क्षेत्र बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा जिससे अल्पसंख्यकों का वोट कमजोर हो जाए।

वार्नॉक ने कहा, ”इसका असर बेहद नुकसानदायक होगा।” उन्होंने मतदान अधिकारों की सुरक्षा के लिए नए कानून बनाने की मांग की।

उन्होंने कांग्रेस से 1965 के वोटिंग राइट्स एक्ट के कुछ अहम प्रावधानों को बहाल करने की अपील की, जिनमें उन राज्यों में चुनावी बदलावों पर संघीय मंजूरी की व्यवस्था शामिल थी, जहां भेदभाव का इतिहास रहा है।

वार्नॉक ने आगे कहा कि पोलिंग बूथ बंद करना और वोटर लिस्ट से नाम हटाने जैसी प्रक्रियाएं भी अल्पसंख्यक समुदायों को ज्यादा प्रभावित करती हैं।

उन्होंने कहा, ”आंकड़े बताते हैं कि इसका असर अश्वेत और अन्य अल्पसंख्यक नागरिकों पर ज्यादा पड़ता है।”

वार्नॉक ने कहा कि इसका स्थायी समाधान पार्टिजन गेरिमैंडरिंग (राजनीतिक लाभ के लिए सीमाएं बदलना) पर पूरी तरह रोक लगाना है, क्योंकि यह लोकतंत्र को कमजोर करता है।

उन्होंने कहा, ”गेरिमैंडरिंग चुनावों को उल्टा कर देता है, जहां जनता नेताओं को चुनने के बजाय नेता अपने मतदाता चुनते हैं।”

उन्होंने बताया कि उन्होंने इस पर रोक लगाने के लिए कानून भी पेश किया है, लेकिन अब तक उसे दोनों दलों का समर्थन नहीं मिला है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद कई राज्यों ने आने वाले चुनावों से पहले अपने चुनावी नक्शों में बदलाव पर विचार शुरू कर दिया है, जिससे प्रतिनिधित्व पर असर को लेकर चिंता बढ़ गई है।

–आईएएनएस

एएमटी/एमएस


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