12 जिलों के पर्यटन स्थलों के लिए आसान होगा सफर,टूर‍िज्‍म को भी नई रफ्तार देगा गंगा एक्सप्रेसवे

पर्यटन विभाग के अनुसार गंगा एक्सप्रेसवे से सबसे अधिक लाभ मेरठ जिले के हस्तिनापुर को मिल सकता है। है। महाभारत काल से जुड़ा हस्तिनापुर जैन धर्म का भी प्रमुख तीर्थस्थल है। बेहतर सड़क संपर्क से दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। पांडेश्वर महादेव मंदिर, करण मंदिर, उल्टा खेड़ा उत्खनन स्थल और हस्तिनापुर वन्यजीव अभ्यारण्य जैसे स्थल अब नई पहचान पाएंगे। संभल क्षेत्र में भी धार्मिक पर्यटन को बल मिलेगा।

 गंगा एक्सप्रेसवे प्रदेश के पर्यटन को भी नई रफ्तार देने जा रहा है। मेरठ से प्रयागराज तक फैले इस एक्सप्रेसवे के आने वाले दिनों में प्रमुख तीर्थ स्थलों को जोड़ने वाले आध्यात्मिक कारिडोर के रूप में सामने आने की उम्मीद है। पश्चिम, मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश को तेज रफ्तार संपर्क से जोड़ रहे इस छह लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे से यात्रा समय में कमी आएगी। इससे पर्यटकों के लिए धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यावरण पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी, साथ ही व्यापार, निवेश, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को भी नई गति मिलेगी।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि देश की प्राचीन सभ्यता का उद्गम और उत्कर्ष गंगा तटों पर ही हुआ है। उसी गंगा मां के समानांतर गंगा एक्सप्रेसवे, विकास की एक नई गाथा है। इससे पर्यटन मानचित्र का विस्तार होगा। जैन सर्किट, महाभारत सर्किट, कल्कि धाम संभल और आसपास के इको-टूरिज्म स्थलों को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

हापुड़ के ब्रजघाट गढ़मुक्तेश्वर, बुलंदशहर के अवंतिका देवी मंदिर, अमरोहा के वासुदेव मंदिर, बदायूं के श्रीरामचंद्र विराजमान मंदिर और शाहजहांपुर के परशुराम मंदिर जैसे स्थलों को भी लाभ मिलेगा। बागपत के लाक्षागृह जैसे ऐतिहासिक स्थलों के पर्यटन महत्व में भी वृद्धि होगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में हरदोई के वनेश्वर महादेव मंदिर, उन्नाव के नवाबगंज इको-टूरिज्म क्षेत्र, रायबरेली के चामुंडा शक्तिपीठ, प्रतापगढ़ के मां ज्वाला देवी धाम और प्रयागराज तक यह मार्ग धार्मिक तथा प्राकृतिक पर्यटन को एक साथ जोड़ता है। प्रयागराज ब्लैक बक रिजर्व जैसे स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यावरण पर्यटन को भी गति मिलेगी।

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