नई दिल्ली, 29 अप्रैल (केसरिया न्यूज़)। भारत केन्या का एक अहम व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 4.31 अरब डॉलर हो गया है। सरकार ने बुधवार को यह जानकारी दी।
भारत और केन्या के बीच कुल व्यापार वित्त वर्ष 2024-25 के 3.45 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 4.31 अरब डॉलर हो गया, जो करीब 24.91 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।
नैरोबी में हुई भारत-केन्या संयुक्त व्यापार समिति (जेटीसी) की 10वीं बैठक में दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों की समीक्षा की गई। इस बैठक की अध्यक्षता वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और केन्या की ट्रेड विभाग की प्रमुख रेजिना अकोता ओम्बम ने की।
वाणिज्य मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि चर्चा में व्यापार को और बढ़ाने, बाजार तक पहुंच से जुड़ी समस्याओं को हल करने और इंजीनियरिंग सामान, दवाइयों, कृषि और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।बैठक में व्यापार को आसान बनाने के लिए चल रही पहल की भी समीक्षा की गई। इसमें भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) और केन्या मानक ब्यूरो के बीच समझौता शामिल है, जिससे मानकों और गुणवत्ता जांच में सहयोग बढ़ेगा।
इसके अलावा, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) और केन्या राजस्व प्राधिकरण के बीच भी एक समझौता हुआ, जिससे कस्टम प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
एक अन्य समझौता भारतीय उद्योग परिसंघ और इंडिया-केन्या चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के बीच हुआ, जिससे व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
दोनों देशों ने स्थानीय मुद्रा में व्यापार करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। इसके तहत लोकल करेंसी सेटलमेंट (एलसीएस) सिस्टम अपनाने की संभावना पर विचार किया गया। विशेष रूप से, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में ऑटोमोबाइल, मशीनरी और निर्माण उपकरण के निर्यात बढ़ाने के अवसरों पर प्रकाश डाला गया।
दवा क्षेत्र में भारत ने सस्ती जेनेरिक दवाइयों और मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति में अपनी भूमिका को बताया और व्यापार बढ़ाने का प्रस्ताव रखा।
नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत ने केन्या के सौर और पवन ऊर्जा प्रोजेक्ट्स में सहयोग देने की इच्छा जताई।
–केसरिया न्यूज़
