कर्नाटक: उमर खालिद पर लिखी किताब के विमोचन पर भाजपा का विरोध, हिरासत में कई नेता


बेंगलुरु, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को डोमलूर इलाके में स्थित बेंगलुरु इंटरनेशनल सेंटर के पास कर्नाटक सरकार द्वारा जेएनयू कार्यकर्ता उमर खालिद पर आधारित पुस्तक के विमोचन की अनुमति देने के विरोध में प्रदर्शन किया। फिलहाल, उमर खालिद 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत तिहाड़ जेल में बंद हैं।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस शासित राज्य सरकार के खिलाफ नारे लगाए और आरोप लगाया कि वे आतंकवादियों का समर्थन करते हैं।

जैसे ही प्रदर्शन शुरू हुआ, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को घेर लिया, उन्हें हिरासत में लिया, और बसों में बैठाकर अज्ञात स्थान पर ले जाया गया।

इस कार्यक्रम को अनुमति न देने की मांग को लेकर सोमवार को बेंगलुरु पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह को एक ज्ञापन भी सौंपा गया था।

भाजपा सांसद पीसी मोहन ने मंगलवार को इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि उमर खालिद 2020 दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपियों में से एक हैं।

उन्होंने कहा, ”2020 दिल्ली दंगों में कई लोगों की जान गई और संपत्ति को नुकसान हुआ। जो व्यक्ति अभी जेल में है, उसे लेकर किताब का विमोचन करने की क्या जरूरत है?”

उन्होंने यह भी कहा कि बेंगलुरु इंटरनेशनल सेंटर, डोमलूर में होने वाले इस कार्यक्रम को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

भाजपा नेता ने कहा, ”हमने बेंगलुरु पुलिस आयुक्त से अनुरोध किया है कि इस कार्यक्रम को होने से रोका जाए।”

कार्यक्रम के आयोजकों की आलोचना करते हुए मोहन ने आरोप लगाया कि ऐसे आयोजन ‘राष्ट्र-विरोधी तत्वों’ का महिमामंडन करते हैं।

उन्होंने कहा, ”अन्य राज्यों में ऐसे कार्यक्रमों की अनुमति नहीं दी जाती, लेकिन कर्नाटक में कांग्रेस सरकार होने के कारण नरम रुख अपनाया जा रहा है, इसी वजह से यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार अप्रत्यक्ष रूप से ऐसे तत्वों को बढ़ावा दे रही है और अधिकारियों से कार्रवाई करने की मांग की।

विधान परिषद में विपक्ष के मुख्य सचेतक एन. रवि कुमार ने भी इस कार्यक्रम का विरोध किया।

उन्होंने कहा कि भाजपा उमर खालिद और शरजील इमाम पर आधारित पुस्तकों के विमोचन का कड़ा विरोध करती है, जो दिल्ली दंगों के मामले में यूएपीए के तहत आरोपी हैं।

उन्होंने कहा, ”राज्य सरकार को किसी भी परिस्थिति में इसकी अनुमति नहीं देनी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि गंभीर आरोपों के बावजूद इस कार्यक्रम की तैयारी की जा रही है।

फरवरी 2020 दिल्ली दंगों का उल्लेख करते हुए रवि कुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।

शरजील इमाम को नागरिकता संशोधन अधिनियम और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान दिए गए भाषणों के लिए गिरफ्तार किया गया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि 2020 दिल्ली दंगों में 53 लोगों की मौत हुई और लगभग 700 लोग घायल हुए।

उन्होंने कहा, ”अब ऐसे व्यक्तियों पर किताब जारी की जा रही है। इसकी क्या आवश्यकता है?”

रवि कुमार ने यह भी बताया कि इस मामले में कुल 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से 11 को जमानत मिल चुकी है, जबकि 7 अभी भी हिरासत में हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे आरोपियों पर आधारित पुस्तक जारी करने का क्या औचित्य है।

–आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी


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