अभिनेत्री वहीदा रहमान ने 'मुगल-ए-आजम' से जुड़ा एक मजेदार किस्सा सुनाया


मुंबई, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। दिग्गज अभिनेत्री वहीदा रहमान ने के. आसिफ की ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ की शूटिंग से जुड़ा एक मजेदार किस्सा सुनाया।

लोकप्रिय चैट शो ‘द कपिल शर्मा शो’ में शिरकत करते हुए वहीदा रहमान ने बताया कि सेट पर वॉशरूम नहीं था।

इस समस्या का समाधान करने के लिए दृढ़ संकल्पित होकर उन्होंने दिवंगत अभिनेता महमूद के साथ स्टूडियो मालिक को कुछ पैसे देकर वॉशरूम की व्यवस्था करने का अनुरोध किया।

हालांकि, जब वे 10 दिन बाद वापस लौटे तो स्टूडियो मालिकों ने उनके लिए जो व्यवस्था की थी, उसे देखकर वे दंग रह गए।

वहीदा रहमान ने अपने शब्दों में उस घटना का ब्योरा देते हुए कहा कि मोहन स्टूडियो में एक भी शौचालय नहीं था, जहां ‘मुगल-ए-आजम’ जैसी फिल्म की शूटिंग हुई थी। इसलिए, मैंने और स्वर्गीय महमूद ने फैसला किया कि हम स्टूडियो मालिकों को पैसे देंगे और उनसे शौचालय बनवाने के लिए कहेंगे। हमने उनसे इस बारे में बात की और चले गए। जब ​​हम 10 दिन बाद अगले शेड्यूल के लिए वापस आए, तो हमने मैनेजर से पूछा कि क्या शौचालय तैयार है। उन्होंने कहा, हां, हमने व्यवस्था कर दी है।

हालांकि, स्टूडियो ने गलियारे में बाथरूम के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए एक थंडर बॉक्स रखा हुआ था।

जब होस्ट कपिल शर्मा ने उन दिनों शूटिंग की मुश्किलों के बारे में पूछा, तो वहीदा रहमान ने बताया कि सेट पर वॉशरूम न होने की वजह से हमने पानी पीना भी बंद कर दिया था।

‘मुगल-ए-आजम’ की बात करें तो इस ऐतिहासिक गाथा में पृथ्वीराज कपूर ने सम्राट अकबर, दिलीप कुमार ने सलीम और मधुबाला ने अनारकली का किरदार निभाया था।

यह प्रोजेक्ट मुगल राजकुमार सलीम और दरबारी नर्तकी अनारकली के प्रेम प्रसंग पर आधारित था। सम्राट अकबर इस रिश्ते को नापसंद करते थे, जिसके चलते पिता-पुत्र के बीच युद्ध छिड़ गया।

अब बात करते हैं वहीदा रहमान की, जिन्होंने 1955 में तेलुगु फिल्म ‘रोजुलु मरायी’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की और ‘प्यासा’ (1957), ‘कागज के फूल’ (1959), ‘चौदहवीं का चांद’ (1960) और ‘साहिब बीबी और गुलाम’ (1962) जैसी फिल्मों से प्रसिद्धि हासिल की।

–आईएएनएस

एमएस/


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