वाशिंगटन, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका ने 2025 और 2026 में स्वास्थ्य सुविधाओं की फंडिंग में काफी कटौती की है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंसी (यूएसएआईडी) ने 5300 से ज्यादा अनुदानों और अनुबंधों को समाप्त कर दिया। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, इसका असर महिलाओं की स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी देखने को मिल रहा है। इसके अलावा, दक्षिण अफ्रीका में एचआईवी से संबंधित सेवाओं की फंडिंग में भी कटौती की है।
अमेरिकी मीडिया सीएनएन के अनुसार, दक्षिण अफ्रीकी देश की नर्स केफिन ओजुंगा ने कहा कि पिछले साल अमेरिका सहायता प्रोग्राम में भारी कटौती के कारण वहां महिलाओं के लिए हालात काफी खराब हो गए।
उन्होंने बताया कि अमेरिकी फंडिंग की वजह से मोबाइल क्लीनिक के जरिए मुफ्त बर्थ कंट्रोल, मैटरनिटी चेकअप और इससे संबंधित अन्य दूसरी स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने में आसानी होती थी। चूंकि ट्रंप सरकार के आदेश पर यूएसएआईडी ने अचानक से फंडिग को खत्म कर दिया। इसके साथ ही फैमिली प्लानिंग के लिए जो फंड दिए जाते थे, उनमें भी कटौती की जाने लगी।
सीएनएन ने पिछले छह महीनों में छह देशों में कई मेडिकल प्रोवाइडर्स और नॉन-प्रॉफिट्स से बात की है। इन लोगों ने स्वास्थ्यकर्मियों की छंटनी, बर्थ कंट्रोल की बहुत ज्यादा कमी और सप्लाई चेन की लगातार चुनौतियों को हालात को और खराब करने वाले फैक्टर्स बताया। दूर-दराज के इलाकों में महिलाओं के पास बहुत कम विकल्प हैं। ऐसे में अमेरिकी फंडिंग में कटौती का बहुत बुरा असर पड़ रहा है।
अमेरिका की इस कटौती का असर फैमिली प्लानिंग से जुड़ी दवाओं के लिए भी एक संकट है। इंटरनेशनल प्लांड पेरेंटहुड फेडरेशन का अनुमान है कि फंडिंग में कटौती की वजह से दुनिया भर में करीब 1,400 मेडिकल क्लिनिक बंद हो गए हैं, जिससे 2025 में 9 मिलियन लोगों को यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पाएंगी।
इस कटौती करने के बाद ट्रंप सरकार ने अब वित्तीय वर्ष 2027 के लिए बजट अपील में विश्व स्वास्थ्य कार्यक्रम में और भी कटौती का प्रस्ताव दिया है। इससे फंडिंग में अरबों डॉलर की कमी आएगी और खास तौर पर सभी रिप्रोडक्टिव हेल्थ प्रोग्राम खत्म हो जाएंगे।
बजट प्रस्ताव में कहा गया है कि व्हाइट हाउस का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी फंडिंग बर्थ कंट्रोल तक बिना रोक-टोक के पहुंच का समर्थन न करे। राष्ट्रपति ट्रंप की बजट अपील मानने लायक नहीं है, क्योंकि कांग्रेस फंडिंग को मंजूरी देती है, लेकिन यह सरकार की खर्च की प्राथमिकता का संकेत है।
–आईएएनएस
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