चंडीगढ़ और पंचकूला में ईडी ने 12 ठिकानों पर छापा मारा, नागरिक एजेंसी-बैंक धोखाधड़ी मामले में दस्तावेज जब्त


चंडीगढ़, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। एक अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि ईडी ने कोटक महिंद्रा बैंक-सह-नगर निगम पंचकूला धोखाधड़ी मामले के सिलसिले में चंडीगढ़, पंचकूला, जीरकपुर, डेरा बस्सी और राजपुरा (पटियाला) में स्थित 12 जगहों पर छापेमारी के दौरान खरीद-बिक्री के समझौते और कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए।

एक अधिकारी ने बताया प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के चंडीगढ़ जोनल ऑफिस ने बुधवार को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत तलाशी अभियान चलाया। बयान में कहा गया है कि तलाशी के दौरान खरीद-बिक्री के समझौते और मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध से जुड़े कई आपत्तिजनक दस्तावेज और सबूत जब्त किए गए।

ईडी की ओर से बताया गया कि इस मामले में ईडी द्वारा शुरू की गई जांच, हरियाणा के पंचकूला स्थित एसीबी की ओर से दर्ज की गई एक एफआईआर पर आधारित है। यह एफआईआर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत कोटक महिंद्रा बैंक के अज्ञात अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज की गई थी।

एफआईआर से पता चलता है कि बैंक के अज्ञात अधिकारियों ने एक गहरी और सुनियोजित आपराधिक साजिश रचकर पंचकूला नगर निगम के 145 करोड़ रुपये का गबन किया। पीएमएलए के तहत अब तक की गई जांच से पता चला है कि नगर निगम के अधिकारियों, बैंक अधिकारियों और निजी व्यक्तियों के एक गुप्त आपराधिक गठजोड़ ने सरकारी फंड के गबन की साजिश रची थी।

ईडी ने बताया कि शुरुआती जांच से पता चला है कि दिलीप कुमार राघव (कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजर, कोटक महिंद्रा बैंक) ने पुष्पेंद्र सिंह (डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट, कोटक महिंद्रा बैंक) के सहयोग से और विकास कौशिक (पूर्व सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर, एमसी, पंचकूला) के समर्थन से, जाली और नकली दस्तावेजों के आधार पर पंचकूला नगर निगम के नाम पर दो बैंक खाते खोले थे।

ईडी ने बताया कि पंचकूला नगर निगम के असली खातों में जमा फंड को, नगर निगम के नाम पर जारी किए गए जाली और अनाधिकृत फंड ट्रांसफर पत्रों का इस्तेमाल करके, इन अनाधिकृत खातों में ट्रांसफर कर दिया गया था। ईडी की ओर से जानकारी दी गई कि बैंक अधिकारियों ने एमसी, पंचकूला के नाम पर मिली जाली और नकली पत्रों के जवाब में, लेन-देन के लिए मंजूरी मांगने के लिए अनाधिकृत ईमेल आईडी का इस्तेमाल किया था।

जबकि पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों में एमसी के अधिकारी ने बताया था कि मंजूरी के लिए अधिकृत ईमेल आईडी अलग थीं। ईडी ने बताया कि इस आपराधिक गठजोड़ द्वारा एमसी, पंचकूला के नाम पर खोले गए अनाधिकृत बैंक खातों में अवैध रूप से ट्रांसफर किए गए फंड का इस्तेमाल, आगे चलकर रजत दह्रा, स्वाति तोमर, कपिल कुमार और विनोद कुमार जैसे फाइनेंसरों को पैसे ट्रांसफर करने के लिए किया गया था। ये पैसे वापस पुष्पेंद्र सिंह और प्रीति ठाकुर (पुष्पेंद्र सिंह की पत्नी) को भेज दिए गए। इसमें बताया गया कि ये पैसे रियल एस्टेट कंपनियों और निजी लोगों को भी ट्रांसफर किए गए थे।

हालांकि, एमसी पंचकूला के रिकॉर्ड में एमसी पंचकूला के असली खातों से हो रहे इन लेन-देन की कोई जानकारी नहीं थी। इसमें बताया गया कि एमसी पंचकूला को जाली एफडीआर दस्तावेज दिए गए थे, जिनमें कोटक महिंद्रा बैंक, सेक्टर-11, पंचकूला में 16 एफडी में लगभग 145.03 करोड़ रुपये के निवेश और लगभग 158.02 करोड़ रुपये की मैच्योरिटी वैल्यू दिखाई गई थी।

इसलिए, 22 अप्रैल, 2028 को पीएमएलए, 2002 के तहत पुष्पेंद्र सिंह, रजत डहरा, दिलीप कुमार राघव, विकास कौशिक, सनत रियल्टर्स, सन्नी गर्ग और कपिल कुमार के ठिकानों पर तलाशी ली गई, जिसके परिणामस्वरूप कई अहम सबूत ज़ब्त किए गए।

–आईएएनएस

एसडी/एबीएम


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