पहलगाम हमले की बरसी पर कानपुर के शुभम द्विवेदी का परिवार आज भी दर्द में डूबा


कानपुर, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की पहली बरसी पर पूरा देश गमगीन है। इस हमले में कानपुर के श्याम नगर निवासी शुभम द्विवेदी समेत 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। एक साल बीत जाने के बाद भी यह हादसा मृतकों के परिजनों के दिलों में गहरे जख्म की तरह है। शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशन्या द्विवेदी और पिता संजय द्विवेदी आज भी उस भयावह दिन को याद कर भावुक हैं।

ऐशन्या द्विवेदी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि स्थानीय लोग, नेता और व्यापारी तमाम लोग परिवार से मिलने आते हैं। वे सभी शुभम द्विवेदी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उन्होंने कहा, “जिंदगी पूरी बदल चुकी है। अब जीवन ऐसा हो चुका है, जो किसी दुश्मन का भी नहीं होना चाहिए। वह मंजर आज भी उन्हें अंदर तक झकझोर देता है और कई बार अचानक वह दृश्य आंखों के सामने ताजा हो जाता है।”

शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशन्या ने बताया कि परिवार इस दुख से अब तक उबर नहीं पाया है और हर दिन एक संघर्ष की तरह गुजर रहा है। उन्होंने समाज सेवा और अपने भविष्य को लेकर भी खुलकर बात की। उनका कहना है कि समाज सेवा के लिए राजनीति में जाना जरूरी नहीं है, लेकिन अगर परिस्थितियां बनती हैं तो वह इस दिशा में भी कदम बढ़ा सकती हैं।

शुभम द्विवेदी के पिता संजय द्विवेदी ने कहा कि यह एक ऐसी घटना थी, जिसकी हममें से किसी ने कभी कल्पना भी नहीं की थी। देश के किसी भी नागरिक ने ऐसे आतंकी हमले के बारे में सोचा भी नहीं था। यह पहली बार था जब देश के दुश्मनों ने देश को अस्थिर करने के इरादे से, धर्म पूछकर लोगों की हत्याएं कीं। यह एक अत्यंत दुखद और स्तब्ध कर देने वाली घटना थी।

उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से यह हमारे परिवार के लिए भी दुखद घटना थी। हम लोग आज भी उस दर्द को महसूस करते हैं और किसी तरीके से अपने जीवन में आगे बढ़ रहे हैं।

शुभम के पिता ने कहा कि हमारी मांग थी कि पहलगाम की घटना का बदला लिया जाए। निश्चित रूप से हमारी सरकार और सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिया पहलगाम का बदला लिया। सरकार से हमारी एक और मांग थी कि इस आतंकी हमले में जान गंवाने वाले सभी 26 लोगों को कोई राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया जाए।

–आईएएनएस

डीसीएच/


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