यूपी: बालवाटिका बनी भविष्य की ‘पहली प्रयोगशाला’, खेल-खेल में विकसित होगा बच्चों का शरीर, मन और बुद्धि

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार बालवाटिका (3 से 6 वर्ष आयु वर्ग) को केवल प्रारंभिक शिक्षा के केंद्र के रूप में ही नहीं, बल्कि भविष्य के सक्षम, संवेदनशील और सृजनशील नागरिकों के निर्माण की ‘पहली प्रयोगशाला’ के रूप में विकसित कर रही है। नई शिक्षा नीति के अनुरूप, प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को एक नई दिशा देते हुए इन केंद्रों को बच्चों के समग्र विकास के आधुनिक हब में बदला जा रहा है।

बालवाटिका के इस नवीन पाठ्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता भारतीय ज्ञान परंपरा के ‘पंचकोश’ सिद्धांत को बाल विकास के पांच वैज्ञानिक आयामों से जोड़ना है। इसमें ‘अन्नमय कोष’ के जरिए शारीरिक विकास, ‘प्राणमय कोष’ से सामाजिक-नैतिक विकास, ‘मनोमय कोष’ से भाषा ज्ञान, ‘विज्ञानमय कोष’ से संज्ञानात्मक विकास और ‘आनंदमय कोष’ के माध्यम से बच्चों के सौंदर्यबोध को निखारा जा रहा है। इसके लिए एससीईआरटी (SCERT) ने चहक, कदम और कलांकुर जैसी विशेष वर्कबुक और गतिविधि पुस्तिकाएं तैयार की हैं, जो खेल और कहानियों के जरिए बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करती हैं।

जिज्ञासा और रचनात्मक सोच पर जोर

पाठ्यक्रम के चरणों को इस तरह तैयार किया गया है कि बच्चों में आत्मविश्वास और जिज्ञासा बढ़े। शारीरिक विकास के लिए खेलकूद, भाषा के लिए संवाद और संज्ञानात्मक विकास के लिए जिज्ञासा आधारित गतिविधियों को शामिल किया गया है। साथ ही, सामाजिक और नैतिक मूल्यों के लिए समूह सहभागिता और सौंदर्यबोध के लिए रचनात्मक कार्यों पर बल दिया गया है, ताकि बच्चे प्रारंभ से ही संवेदनशील और सृजनात्मक सोच वाले नागरिक बन सकें।

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