कर्नाटक: दावणगेरे सीट को लेकर क्यों बिफरे मुस्लिम नेता? बताई असली वजह


दावणगेरे, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। शमनूर शिवशंकरप्पा के निधन के बाद कर्नाटक की दावणगेरे सीट खाली हो गई, जिसके बाद जमीयत उलेमा-ए-कर्नाटक के नेताओं ने यहां कांग्रेस पार्टी से किसी मुस्लिम प्रत्याशी को उतारने की मांग की थी, लेकिन कांग्रेस ने इस सीट पर शमनूर शिवशंकरप्पा के पोते को टिकट दे दिया। इसके बाद उलेमा-ए-कर्नाटक के मुस्लिम नेताओं ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए नाराजगी जाहिर की।

इतना ही नहीं, इन नेताओं ने यहां तक कह दिया कि कांग्रेस पार्टी इस बार मुस्लिम समुदाय को उपेक्षित करके बहुत बड़ी गलत कर दी है। इस वजह से अन्य राज्यों में भी कांग्रेस को कई प्रकार की राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना होगा।

जमीयत उलेमा-ए-कर्नाटक के अध्यक्ष मुफ्ती इफ्तिखार अहमद कासमी ने कहा कि जब हमने 2023 में कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से बात की थी, तो उन्होंने मुस्लिम समुदाय को टिकट नहीं देने के पीछे जो वजह बताई, वह हमें हजम नहीं हो पाई। कांग्रेस की तरफ से हमें कहा गया कि जब बागलकोट में मैती साहब का निधन हुआ था, तो उनके बेटे को टिकट दिया गया था। इसी तरह, जब दावणकोर में शमनूर शिवशंकरप्पा का निधन हुआ है, तो हमने उनके पोते को टिकट देने का फैसला किया है। यकीन मानिए, हमें ये जवाब हजम नहीं हुआ है। मैं एक बात आपको बता दूं कि पहले से ही शिवशंकरप्पा के बेटे विधायक और मंत्री का पद संभाल रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि इन्हीं सब स्थितियों को ध्यान में रखते हुए हमने मांग की थी कि इस बार इस सीट पर परिवार के सदस्य को टिकट नहीं देते हुए अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े किसी व्यक्ति को टिकट दिया जाए, लेकिन हमें अफसोस रहेगा कि कांग्रेस पार्टी की ओर से इस दिशा में किसी भी प्रकार का कदम नहीं उठाया गया। इतना ही नहीं, इसके बाद एक नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला कि जब जब्बार और नसीर साहब को उनके पद से हटा दिया गया। ध्यान देने वाली बात यह है कि इन दोनों को पद से हटाने के लिए इनके ऊपर योजनाबद्ध तरीके से दबाव बनाने की कोशिश की गई। उधर, इससे पहले पार्टी के कई नेता और मंत्री कैमरे के सामने आकर पार्टी के विरोध में अपना रोष जाहिर कर चुके हैं, लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। इन सभी बातों से हमारा दिल दुखी है।

उन्होंने कहा कि हमारा रोष प्रकट करने का मुख्य उद्देश्य यही है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को इस बात का एहसास हो कि इन लोगों ने किस तरह से योजनाबद्ध तरीके से हमारी हितों पर कुठाराघात करने की कोशिश की, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता है। अगर हमारे रोष के बारे में जानकर पार्टी के लोग खुद को सुधारते हैं तो यकीन मानिए हमें खुशी होगी।

साथ ही, उन्होंने इस बात को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें यह कहा जा रहा है कि मुस्लिम नेताओं ने अपनी गतिविधियों का सहारा लेकर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को धमकाने की कोशिश की है। इस पर मुफ्ती इफ्तिखार अहमद कासमी ने स्पष्ट किया कि हमने किसी को भी धमकाने की कोशिश नहीं की है। हम सिर्फ पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। हम उन्हें यह बताना चाहते हैं कि किस तरह से इन लोगों ने हमारे हितों पर कुठाराघात करने की कोशिश की है। हम इस तरह की स्थिति को आगे चलकर किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं।

इसके अलावा, वेलफेयर ऑफ ह्यूमैनिटी फाउंडेशन के अध्यक्ष मौलाना शब्बीर अहमद नदवी ने मुख्यमंत्री के सलाहकार अब्दुल जब्बार के इस्तीफे और जब्बार अहमद की ओर से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के फैसले पर भी नाराजगी जाहिर की।

उन्होंने कहा कि अभी तक दावणगेरे उपचुनाव को लेकर नतीजे भी सामने नहीं आए। कम से कम नतीजे तो सामने आने देते। इसके बाद पार्टी की तरफ से किसी भी प्रकार की कार्रवाई की जाती तो हम उसका स्वागत करते हैं। पार्टी को सबसे पहले इन नेताओं को चिन्हित करके नोटिस जारी करना चाहिए था और इसके बाद उन्हें सफाई रखने का मौका दिया जाना चाहिए था, इसके बाद किसी भी प्रकार की कार्रवाई करती। हमें इससे कोई आपत्ति नहीं होती, लेकिन अफसोस की बात है कि नतीजों की घोषणा से पहले ही इस तरह की कार्रवाई कर दी गई, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

साथ ही, उन्होंने कहा कि हमने दावणगेरे विधानसभा सीट से मुस्लिम समुदाय के प्रत्याशी को चुनावी मैदान में उतारने के लिए सिद्दारमैया, मल्लिकार्जुन खड़गे और सुरजेवाला से भी मुलाकात थी। यही नहीं, सुरजेवाला ने हमें आश्वस्त किया था कि इस सीट से मुस्लिम समुदाय के प्रत्याशी को ही चुनावी मैदान में उतारा जाएगा, लेकिन हमें मलाल रहेगा कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस दिशा में किसी भी प्रकार का कदम नहीं उठाया गया है।

कल्याणकारी स्कूलों के संयोजक सैयद आसिम अब्दुल्ला ने 2023 के विधानसभा चुनाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह चुनाव हमारे लिए एक रोल मॉडल की तरह था। इसी को देखते हुए हम पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मांग करते हैं कि वो हमारी मांगों पर विचार करें। अगर वो हमारी मांगों पर विचार नहीं करेंगे तो आगे चलकर स्थिति दूसरी तरह की बन जाएगी।

–आईएएनएस

डीकेपी/


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