रायपुर, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ की दंतेवाड़ा पुलिस ने एक बड़े अंतर-राज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो ‘म्यूल बैंक खातों’ की थोक खरीद-बिक्री में शामिल था।
राजस्थान से चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और ट्रांजिट रिमांड पर दंतेवाड़ा लाया गया। ये गिरफ्तारियां बढ़ते साइबर अपराधों के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी सफलता हैं, जिनसे कई राज्यों के पीड़ित प्रभावित हुए हैं।
यह गिरोह मुख्य रूप से सैकड़ों बैंक खाते खरीदने और बेचने का काम करता था। इन खातों का इस्तेमाल ‘म्यूल अकाउंट’ (बिचौलिये खातों) के तौर पर किया जाता था, जिनके जरिए साइबर धोखाधड़ी के पीड़ितों से पैसे निकाले जाते थे। इन अवैध लेन-देन को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करके वाट्सअप अकाउंट बनाए थे।
विभिन्न साइबर घोटालों के जरिए हासिल की गई रकम इन खातों में जमा की जाती थी, और बाद में विदेश में मौजूद एटीएम से, ज्यादा ट्रांजेक्शन लिमिट वाले डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करके, नकद में निकाल ली जाती थी।
दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक गौरव राय, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आर.के. बर्मन, और साइबर सेल के नोडल अधिकारी डीएसपी गौरव सिंह ने इस ऑपरेशन का नेतृत्व किया। इस महीने की शुरुआत में, इंस्पेक्टर संजय उरसा के नेतृत्व में बारसूर, बचेली और गीदम पुलिस स्टेशनों की एक संयुक्त टीम को राजस्थान भेजा गया था।
वित्तीय लेन-देन के विश्लेषण और आधुनिक साइबर फोरेंसिक उपकरणों के जरिए बारीकी से नजर रखने के बाद, टीम ने सफलतापूर्वक आरोपियों को धर दबोचा। गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान अर्चित गुजराती (20, निवासी नकाश गेट, नागौर); आदिल हुसैन (24, निवासी बच्चखड़ा, नागौर); अमित वर्मा (21, निवासी गांव करीरी, जयपुर); और भूपेंद्र जांगिड़ (23, निवासी बालाजी नगर, जोधपुर) के रूप में हुई है। ये सभी राजस्थान के रहने वाले हैं।
पुलिस ने इनके कब्जे से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, एटीएम कार्ड और धोखाधड़ी के जरिए कमाए गए 1,18,500 रुपए नकद बरामद किए हैं। इस गिरोह के खिलाफ छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों में साइबर धोखाधड़ी की 20 से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गई हैं।
जांच में पता चला कि यह गिरोह मुख्य रूप से राजस्थान के नागौर इलाके से संचालित हो रहा था। दंतेवाड़ा पुलिस कस्बों और गांवों में सक्रिय रूप से जागरूकता अभियान चला रही है, और लोगों को बैंकिंग धोखाधड़ी, पार्ट-टाइम नौकरी के नाम पर होने वाले घोटालों, और ओटीपी या संदिग्ध लिंक साझा करने के खतरों जैसे विभिन्न साइबर खतरों के बारे में जागरूक कर रही है।
–आईएएनएस
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