नई दिल्ली, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्र सरकार संसद में महिला आरक्षण बिल पेश करने की तैयारी में है। इस बीच कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने शनिवार को ‘महिला आरक्षण बिल’ को लेकर सरकार से सवाल किए।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, “अभी तक बिल का मसौदा किसी के सामने नहीं है। प्रधानमंत्री अखबारों में लेख लिख रहे हैं, लेकिन वे क्या संशोधन चाहते हैं, यह स्पष्ट नहीं है। जब तक संशोधन औपचारिक रूप से सभी सांसदों के पास नहीं पहुंचता और राजनीतिक दलों को नहीं बताया जाता कि सरकार क्या करना चाहती है, तब तक इस पर कोई टिप्पणी अनुमानित ही होगी।”
उन्होंने कहा, “2023 में जो महिला आरक्षण बिल पारित किया गया था, उसमें साफ लिखा था कि पहले परिसीमन होगा, उसके बाद एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। हम महिला आरक्षण के बहुत बड़े समर्थक हैं। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की पहल पर यूपीए सरकार के दौरान राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पास किया गया था।”
कांग्रेस नेता ने अपनी व्यक्तिगत राय देते हुए कहा, “मैं 33 प्रतिशत नहीं, बल्कि 50 प्रतिशत महिला आरक्षण का पक्षधर हूं। जितनी महिलाओं की जनसंख्या है, उतना आरक्षण उन्हें दिया जाना चाहिए, लेकिन बुनियादी बात यह है कि सरकार सांसदों को बताए कि वह आखिर क्या करना चाहती है। आज तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक संशोधन नहीं लाया गया है।”
मनीष तिवारी ने लोकसभा की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा, “वर्तमान में 543 सदस्यों वाली लोकसभा ठीक से नहीं चल पा रही है। जब सीटों की संख्या बढ़ जाएगी तो सदन कैसे चलेगा, यह भी एक बड़ा सवाल है।”
बिहार के राजद नेता मंगनी लाल मंडल ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि उनकी पार्टी लोहियावादी विचारधारा की है और नर-नारी समता की पक्षधर है। डॉ. राममनोहर लोहिया का सिद्धांत हमेशा महिलाओं को आगे बढ़ाने का रहा है, इसलिए महिला आरक्षण के लिए जो भी प्रस्ताव आएगा, राजद उसका समर्थन करेगी।
मंगनी लाल मंडल ने जोर देकर कहा, “हम महिला आरक्षण के पूर्ण समर्थक हैं। महिलाओं को उनकी आबादी के अनुपात में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।”
–आईएएनएस
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