लखनऊ के हिंदी संस्थान में रूबरू फाउंडेशन ने ‘कांच पर चलते लोग’ ड्रामा संग्रह का लोकार्पण किया

रंगमंच और साहित्य के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु

विशिष्ट अतिथि सुशील कुमार सिंह ने ‘कांच पर चलते लोग’ को रंगमंच और साहित्य के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बताया। अन्य वक्ताओं ने भी पुस्तक की प्रासंगिकता और उसके प्रभाव पर अपने विचार व्यक्त किए।समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ, जिसके बाद सूफियाना ग्रुप डांस ने प्रस्तुति दी। इसके उपरांत पुस्तक का विमोचन किया गया और उस पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन हुआ ।

लखनऊ के हजरतगंज स्थित हिंदी संस्थान में शुक्रवार को रूबरू फाउंडेशन ने बहुप्रतीक्षित ड्रामा संग्रह ‘कांच पर चलते लोग’का लोकार्पण किया। इस अवसर पर साहित्य और रंगमंच से जुड़े बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. अनिल कुमार रस्तोगी ने की। उन्होंने पुस्तक को समकालीन यथार्थ की मजबूत अभिव्यक्ति बताते हुए इसकी संवेदनशीलता और समाज से गहरे जुड़ाव पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि जज जूही कुद्दूसी ने लेखक इरशाद राही की रचनात्मक दृष्टि की सराहना करते हुए कहा कि यह कृति समाज के अनदेखे पहलुओं को सामने लाती है।

कॉलेजों के छात्रों को सम्मानित किया गया

इस अवसर पर ‘डिजिटल युग में रंगमंच का महत्व’ विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विभिन्न कॉलेजों के छात्रों को सम्मानित किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और शायरी भी कार्यक्रम का हिस्सा रहीं।संस्था के सचिव मोहम्मद अजहर हुसैन ने बताया कि रूबरू फाउंडेशन हिंदी-उर्दू के रचनाकारों को एक साझा मंच प्रदान कर रही है।

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