नई दिल्ली, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में 5जी सर्विस शुरू होना एक बड़ा कदम है, लेकिन देश की आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियों के कारण यह टेक्नोलॉजी अभी ज्यादातर मार्केटिंग स्टोरी लगती है, असली कामकाजी हकीकत नहीं।
डेली मिरर की रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान में 5जी सिग्नल के लिए जरूरी फिजिकल नेटवर्क बहुत कमजोर है, खासकर वह नेटवर्क जो मोबाइल टावरों को मुख्य नेटवर्क से जोड़ता है।
दुनिया में फाइबर-ऑप्टिक केबल को सबसे अच्छा माना जाता है। यह सेकंड में टेराबिट्स डेटा ले जा सकता है और इसकी लेटेंसी मिलीसेकंड के हिस्सों में होती है। 5जी स्टैंडअलोन नेटवर्क के लिए, हर साइट पर दस जीबीपीएस से ज्यादा की बैकहॉल स्पीड और पांच मिलीसेकंड से कम राउंड-ट्रिप टाइम जरूरी है।
पाकिस्तान में सिर्फ 15 प्रतशित मोबाइल टावर फाइबर से जुड़े हैं बाकी 85 प्रतिशत टावर माइक्रोवेव रेडियो लिंक पर निर्भर हैं, जिनकी क्षमता सीमित है, खराब मौसम में ये कमजोर हो जाते हैं और 5जी ट्रैफिक को संभाल नहीं सकते।
इस साल मार्च में इस्लामाबाद में स्पेक्ट्रम की नीलामी हुई, जिसमें 480 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम 507 मिलियन डॉलर में बिका और इस्तेमाल के लिए स्पेक्ट्रम लगभग तीन गुना बढ़ गया। रिपोर्ट के अनुसार, यह सिर्फ पहला कदम है और यह लंबा और मुश्किल रास्ता है।
एक साइट को फाइबर से जोड़ने का खर्च लगभग 10,000 से 20,000 डॉलर है। देश में हजारों साइट्स हैं, जिन्हें अपग्रेड करना है, लेकिन इस तरह का खर्च हाल ही में जुटाए गए आधे बिलियन डॉलर से बहुत ज्यादा है।
पाकिस्तान के राइट-ऑफ-वे फीस की भी समस्या है। हर साल प्रति मीटर पीकेआर 35 से 60 देना पड़ता है, जबकि भारत में एक बार ही फीस देनी होती है। इसका मतलब यह है कि एक बार का खर्च हर साल खर्च बन जाता है, जो निवेशकों को हतोत्साहित करता है।
इस वजह से जीएसएमए फाइबर डेवलपमेंट इंडेक्स में पाकिस्तान 93 देशों में से 76वें नंबर पर है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि बिना सुधार के फाइबराइजेशन देश के 5जी रोलआउट की सबसे बड़ी कमजोरी बनी रहेगी।
इसके अलावा, पाकिस्तान में 5जी के लिए मांग भी कम है। देश में सिर्फ एक प्रतिशत मोबाइल हैंडसेट 5जी सपोर्ट करते हैं। लगभग 90 प्रतिशत स्थानीय रूप से बने फोन अभी भी सिर्फ 2जी या 3जी तक ही सीमित हैं।
–आईएएनएस
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