हवाई किराया बढ़ा तो सरकार करेगी दखल: एयरलाइंस के साथ जल्द बैठक; ATF के दाम दोगुने, इंडिगो की उड़ानें ₹10,000 तक महंगी।

एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद कई एयरलाइंस ने फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया है। इससे यात्रियों पर बढ़ते बोझ को देखते हुए केंद्र सरकार अब इस मामले में हस्तक्षेप करने की तैयारी में है।

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार जल्द ही एयरलाइंस के साथ मीटिंग कर सकती है ताकि आम लोगों को महंगे सफर से राहत मिल सके।

सरकार ने अभी तक कोई लिखित निर्देश तो जारी नहीं किया है, लेकिन एयरलाइंस से उनकी प्राइसिंग स्ट्रैटेजी को लेकर स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यात्री किरायों में बढ़ोतरी न हो।

घरेलू उड़ानों के किराए में 8.5% बढ़ोतरी, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के दाम दोगुने।

एटीएफ की कीमतों में हाल ही में सोझ समझकर बढ़ोतरी की गई थी। सरकार ने एविएशन सेक्टर को सपोर्ट देने के लिए कीमतों में कुल 25% की बढ़ोतरी की अनुमति दी थी। हालांकि, आम यात्रियों को राहत देने के लिए घरेलू ऑपरेशंस के लिए प्रभावी बढ़ोतरी को करीब 8.5% तक ही सीमित रखा गया था।

वहीं इंटरनेशनल ऑपरेशंस और चार्टर्ड फ्लाइट्स के लिए एटीएफ के दाम लगभग दोगुने हो गए हैं। यह 96,638.14 रुपए प्रति किलोलीटर से बढ़कर 2,07,341.22 रुपए प्रति किलोलीटर पर पहुंच गया है। घरेलू एटीएफ की कीमत अब 1,04,927.18 रुपए प्रति किलोलीटर हो गई है।

एटीएफ कीमतों में बदलाव

कैटेगरीपुरानी कीमत (₹प्रति किलोलीटर)नई कीमत (₹प्रति किलोलीटर)बदलाव
इंटरनेशनल एटीएफ₹96,638₹2,07,341+114%
डोमेस्टिक एटीएफ₹96,638₹1,04,927+8.5%

इंडिगो ने फ्यूल सरचार्ज 10 हजार रुपए तक बढ़ाया

भले ही सरकार ने घरेलू स्तर पर बोझ कम रखने की कोशिश की, लेकिन देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने फ्यूल सरचार्ज में बदलाव किया। इंडिगो ने पहले के 425 रुपए के फ्लैट सरचार्ज को हटाकर अब दूरी के हिसाब से नया स्ट्रक्चर लागू किया है।

डोमेस्टिक रूट्स: अब दूरी के आधार पर 275 रुपए से लेकर 950 रुपए तक का फ्यूल सरचार्ज लगेगा। कम दूरी की उड़ानों के लिए यह राहत की बात है, लेकिन लंबी दूरी की घरेलू उड़ानें महंगी हो गई हैं।

इंटरनेशनल रूट्स: यहां सबसे ज्यादा असर पड़ा है। यूरोप जैसे लॉन्ग-हॉल रूट्स पर इंडिगो ने फ्यूल सरचार्ज 10,000 रुपए तक बढ़ा दिया है। ये नई दरें 2 अप्रैल से लागू हो चुकी हैं।

जेट फ्यूल एयरलाइंस की लागत का लगभग 40% हिस्सा

एविएशन सेक्टर के जानकारों का कहना है कि किसी भी एयरलाइन के कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट (परिचालन लागत) में फ्यूल का हिस्सा करीब 40% होता है। ऐसे में एटीएफ की कीमतों में मामूली बदलाव भी एयरलाइंस के मुनाफे पर सीधा असर डालता है। एयरलाइंस का तर्क है कि लागत बढ़ने की वजह से वे इस बोझ को यात्रियों पर डालने के लिए मजबूर हैं।

क्या सरकार के हस्तक्षेप से किराया कम होगा?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि केंद्र सरकार के दखल के बाद एयरलाइंस को अपने बढ़े हुए सरचार्ज पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है। सरकार चाहती है कि एयरलाइंस पूरा बोझ ग्राहकों पर न डालें, बल्कि इसे धीरे-धीरे एडजस्ट करें। अगर बातचीत सफल रहती है, तो आने वाले दिनों में कुछ रूट्स पर सरचार्ज में कटौती या रोलबैक देखने को मिल सकता है।

फ्यूल सरचार्ज क्या होता है ?

जब तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुत बढ़ जाती हैं, तो एयरलाइंस बेस फेयर (आधार किराया) बढ़ाने के बजाय टिकट पर एक अतिरिक्त शुल्क जोड़ देती हैं, जिसे फ्यूल सरचार्ज कहते हैं। तेल की कीमतें कम होने पर इसे घटाया या हटाया जा सकता है, जबकि बेस फेयर में बदलाव करना थोड़ा जटिल होता है।

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