रांची, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर कमीशन घोटाले के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी राज्य के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम और उनके निजी सचिव संजीव लाल को जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने उनकी याचिकाएं खारिज करते हुए मामले की सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया है। दोनों आरोपी पिछले डेढ़ साल से भी अधिक समय से जेल में बंद हैं।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटेश्वर सिंह की पीठ ने ट्रायल कोर्ट को चार सप्ताह के भीतर प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज करने का निर्देश दिया। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई की तिथि गवाहों की जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय की जाएगी।
सुनवाई के दौरान आलमगीर आलम की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि उनकी उम्र 76 वर्ष है और वह मई 2024 से न्यायिक हिरासत में हैं। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा बार-बार पूरक आरोपपत्र दाखिल किए जाने से मुकदमे की प्रगति प्रभावित हुई है और अब तक अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली है।
हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को पर्याप्त नहीं मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया और ट्रायल में तेजी लाने पर जोर दिया। संजीव लाल की ओर से भी समान आधार पर जमानत की मांग की गई थी, जिसे अदालत ने फिलहाल अस्वीकार कर दिया।
बता दें कि ईडी ने 6 मई 2024 को संजीव लाल और उनके करीबी जहांगीर आलम के ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसमें 32.20 करोड़ रुपए नकद बरामद किए गए थे। जांच के दौरान संजीव लाल के पास से 10.05 लाख रुपए नकद और एक डायरी भी मिली थी, जिसमें कथित तौर पर टेंडर कमीशन से जुड़े लेनदेन का विवरण दर्ज था।
ईडी ने पूछताछ के बाद 15 मई 2024 को आलमगीर आलम को गिरफ्तार किया था। एजेंसी की जांच में सामने आया कि विभाग में कथित रूप से कमीशन का एक संगठित नेटवर्क संचालित हो रहा था। आरोप है कि टेंडर आवंटन के बदले ठेकेदारों से कुल मूल्य का लगभग तीन प्रतिशत कमीशन लिया जाता था और इसे विभिन्न स्तरों पर बांटा जाता था।
ईडी के अनुसार, इस कथित व्यवस्था में 1.35 प्रतिशत राशि तत्कालीन मंत्री तक उनके निजी सचिव के माध्यम से पहुंचती थी, जबकि 0.65 से एक प्रतिशत तक विभागीय सचिव को और शेष राशि अन्य अधिकारियों एवं इंजीनियरों को दी जाती थी। जांच में लगभग 3,048 करोड़ रुपए के टेंडर आवंटन के मुकाबले 90 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई का पता चला है।
–आईएएनएस
एसएनसी/डीकेपी
