अमृतसर, 29 मार्च (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में कानपुर के रहने वाले अमित सिंह राणा वर्तमान में अमृतसर में रहते हैं। अमित पांडुलिपियों का सर्वे और शोध करके भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने का प्रयास कर रहे हैं। पीएम मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात में उनके पांडुलिपियों से संबंधित कार्य की सराहना की।
‘मन की बात’ के दौरान अमृतसर से संबंधित एक व्यक्ति अमित सिंह राणा का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। प्रधानमंत्री द्वारा उनके कार्य की प्रशंसा किए जाने से अमृतसरवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
आईएएनएस से बातचीत में अमित सिंह राणा ने बताया कि वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर के निवासी हैं, लेकिन वर्ष 2013 से अमृतसर में रह रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री द्वारा उनका नाम लिया जाना बहुत गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि वे सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिल से धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने उनके काम को देश के सामने रखा।
अमित सिंह राणा ने बताया कि वे भारत की प्राचीन वैदिक ज्ञान परंपरा से जुड़ी पांडुलिपियों के संरक्षण और शोध कार्य में लगे हुए हैं। देश के कई घरों, मठों, मंदिरों, विद्यालयों और पुस्तकालयों में ऐसी प्राचीन पांडुलिपियां मौजूद हैं, जो हमारी सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन पांडुलिपियों का सर्वे और शोध करके वह उन्हें भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अकसर लोग अपने घरों में रखी प्राचीन पांडुलिपियों को केवल निजी धरोहर समझकर संभालकर रखते हैं, जबकि वास्तव में यह हमारी राष्ट्रीय विरासत का अहम हिस्सा हैं। इसलिए वे लोगों को प्रेरित कर रहे हैं कि यदि उनके पास ऐसी पांडुलिपियां हैं, तो वे इसकी जानकारी भारत सरकार तक पहुंचाएं, ताकि उनका संरक्षण और अध्ययन किया जा सके। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वे इस मुहिम को और बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे, ताकि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को सुरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सके।
अमित ने बताया कि साल 2006 में राष्ट्रीय अभिलेखागार से कोर्स किया था। वहां पांडुलिपि के बारे में अभिलेखों के बारे में जानकारी मिली। कोर्स करने के बाद विभिन्न राज्यों में अभिलेखों में पांडुलिपि के संरक्षण का कार्य किया।
पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में कहा कि अगर आपके पास अगर कोई पांडुलिपि है या उसके बारे में जानकारी है, तो उसकी फोटो ‘ज्ञान भारतम ऐप’ पर जरूर साझा करें। हर एंट्री से जुड़ी जानकारी को दर्ज करने से पहले उसकी पुष्टि भी की जा रही है। उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि अब तक हजारों पांडुलिपि लोगों ने शेयर की हैं।
इस दौरान, पीएम मोदी ने अरुणाचल प्रदेश के नामसाई के चाओ नंतिसिन्ध लोकांग और अमृतसर के अमित सिंह राणा का उदाहरण दिया।
उन्होंने बताया कि चाओ नंतिसिन्ध लोकांग ने ताई लिपि में पांडुलिपियां साझा की हैं। अमृतसर के भाई अमित सिंह राणा ने गुरुमुखी लिपि में पांडुलिपि शेयर की हैं। यह हमारी महान सिख परंपरा और पंजाबी भाषा से जुड़ी लिपि है। कुछ संस्थाओं ने ताड़ के पत्तों पर लिखी पांडुलिपि दी हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान के अभय जैन ग्रंथालय का भी उदाहरण दिया, जिन्होंने कॉपर प्लेट्स पर लिखी बहुत पुरानी पांडुलिपियां शेयर की हैं। लद्दाख की हेमिस मोनास्ट्री का नाम लेते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने तिब्बती में बहुमूल्य पांडुलिपियों के बारे में जानकारी दी है।
–आईएएनएस
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