नई दिल्ली, 28 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और इनोवेशन के क्षेत्रों में बेहतरीन योगदान को पहचानने के लिए राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार (आरवीपी) 2026 के लिए नॉमिनेशन आमंत्रित किए।
नामांकन 28 मार्च से 11 मई तक सरकार के पुरस्कार पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन जमा किए जा सकते हैं।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह के मुताबिक ये पुरस्कार वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के अधीन आरवीपी सचिवालय द्वारा प्रशासित किए जाते हैं, जिसकी अध्यक्षता सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार करते हैं।
राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार उन वैज्ञानिकों, प्रौद्योगिकीविदों और इनोवेटर्स को सम्मानित करता है, जिनका कार्य भारत की वैज्ञानिक प्रगति और राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
स्व-नामांकन सहित नामांकन कृषि विज्ञान, परमाणु ऊर्जा, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, रक्षा प्रौद्योगिकी, भूविज्ञान, अभियांत्रिकी, पर्यावरण विज्ञान, गणित और कंप्यूटर विज्ञान, चिकित्सा, भौतिकी, अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा नवाचार जैसे विभिन्न क्षेत्रों में खुले हैं।
ये पुरस्कार चार श्रेणियों आजीवन उपलब्धि के लिए विज्ञान रत्न, विशिष्ट योगदान के लिए विज्ञान श्री, 45 वर्ष तक की आयु के युवा वैज्ञानिकों के लिए विज्ञान युवा-शांति स्वरूप भटनागर और तीन या अधिक शोधकर्ताओं को शामिल करने वाली सहयोगात्मक उत्कृष्टता के लिए विज्ञान टीम में प्रदान किए जाएंगे।
इस बीच, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये पुरस्कार वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र में उत्कृष्टता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता हैं।
उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ये पुरस्कार उन वैज्ञानिकों और नवोन्मेषकों की जिज्ञासा और समर्पण की भावना का सम्मान करते हैं जो भारत को वैश्विक ज्ञान नेता के रूप में उभरने में योगदान दे रहे हैं।”
उन्होंने संस्थानों, उद्योग निकायों और व्यक्तियों से देशभर में वैज्ञानिक प्रतिभा की व्यापक पहचान सुनिश्चित करने के लिए नामांकन प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने का भी आग्रह किया।
पुरस्कारों के महत्व पर जोर देते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि इनका उद्देश्य भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना और विभिन्न क्षेत्रों में योगदान को मान्यता देना है।
–आईएएनएस
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