नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। अदाणी पावर को रेटिंग एजेंसी केयरएज ने ईएसजी (पर्यावरण, सामाजिक और गवर्नेंस) में 80.0 की रेटिंग दी है, जिससे कंपनी ‘लीडरशिप’ कैटेगरी में आ गई है। खास बात यह है कि कंपनी ने कार्बन-इंटेंसिव थर्मल पावर सेक्टर में काम करने के बावजूद यह उपलब्धि हासिल की है। मंगलवार को यह घोषणा की गई।
भारत की सबसे बड़ी निजी बिजली उत्पादक कंपनी ने पर्यावरण के क्षेत्र में इंडस्ट्री के औसत प्रदर्शन से काफी बेहतर प्रदर्शन किया है, जो पावर सेक्टर में सबसे ज्यादा महत्व रखता है।
अदाणी पावर को पर्यावरण के क्षेत्र में 75.6 का स्कोर मिला, जबकि इंडस्ट्री का औसत स्कोर 50.2 है। यह सुधार उत्सर्जन में कमी, कम बिजली खपत और बेहतर ऊर्जा दक्षता के कारण हुआ है।
कंपनी की कुल स्थापित क्षमता का 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा सुपरक्रिटिकल और अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक पर आधारित है, जिससे कम कोयले में ज्यादा बिजली बनती है और प्रदूषण भी कम होता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में कंपनी की कुल उत्सर्जन मात्रा बढ़ी है क्योंकि क्षमता बढ़ाई गई है, लेकिन प्रति यूनिट उत्सर्जन में लगभग 1 प्रतिशत की कमी आई है, जो इंडस्ट्री के औसत से बेहतर है।
इसके अलावा, स्कोप 2 उत्सर्जन बहुत कम रहा है, क्योंकि कंपनी अपने खुद के बिजली उत्पादन और रूफटॉप सोलर सिस्टम का इस्तेमाल कर रही है।
अदाणी पावर की डिकार्बोनाइजेशन रणनीति 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने के लक्ष्य पर आधारित है, जो भारत के जलवायु लक्ष्यों और पेरिस समझौते के अनुरूप है।
कंपनी फिलहाल ऊर्जा दक्षता बढ़ाने पर ध्यान दे रही है, जबकि भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण और कार्बन कैप्चर जैसी नई तकनीकों पर काम करेगी।
सामाजिक क्षेत्र में कंपनी को 81.6 का स्कोर मिला है, जो कर्मचारियों की सुरक्षा, सामुदायिक विकास और कर्मचारी कल्याण जैसे क्षेत्रों में अच्छे प्रदर्शन को दिखाता है।
कंपनी के सीएसआर कार्यक्रमों से 12.3 लाख से ज्यादा लोगों को फायदा हुआ है, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और बुनियादी ढांचे से जुड़े काम शामिल हैं।
गवर्नेंस में अदाणी पावर को 85.8 का स्कोर मिला है, जो मजबूत नियम पालन और बेहतर प्रबंधन व्यवस्था को दर्शाता है।
कंपनी की वर्तमान बिजली उत्पादन क्षमता 18.15 गीगावाट (जीडब्ल्यू) है, जिसे 2032 तक बढ़ाकर 23.72 जीडब्ल्यू करने की योजना है। इसके लिए 22 अरब डॉलर का निवेश किया जाएगा, जो इस सेक्टर में भारत का सबसे बड़ा निजी क्षेत्र का निवेश माना जा रहा है।
–आईएएनएस
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