कोलकाता, 23 मार्च (आईएएनएस)। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने सोमवार शाम को एक अहम घटनाक्रम में पश्चिम बंगाल में 73 रिटर्निंग अधिकारियों (आरओ) को हटा दिया। पश्चिम बंगाल में अगले महीने 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में चुनाव होने हैं।
इस घटनाक्रम से चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच टकराव का एक नया मोर्चा खुल गया है। राज्य सरकार और सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पहले से ही आयोग के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। यह विरोध राज्य कैडर के कई नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के तबादले को लेकर है, जिनमें पूर्व मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, पूर्व राज्य गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा, पूर्व कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक पीयूष पांडे और कोलकाता पुलिस के पूर्व कमिश्नर सुप्रतिम सरकार जैसे नाम शामिल हैं।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा सीटों की कुल संख्या 294 है और हर सीट के लिए आमतौर पर एक रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) नियुक्त किया जाता है। 73 आरओ को हटाए जाने के साथ ही, राज्य में कुल आरओ में से लगभग 26 प्रतिशत को बदल दिया गया है। आयोग ने सोमवार रात इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की।
इस बीच, कलकत्ता हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई। याचिका में राज्य कैडर के कई शीर्ष नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के तबादले के ईसीआई के फैसले को चुनौती दी गई है। इस मामले पर प्रारंभिक सुनवाई सोमवार को हुई।
सुनवाई के दौरान, ईसीआई के वकील ने कलकत्ता हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच को बताया कि नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के तबादले हर राज्य में जमीनी स्तर की जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग होते हैं। वकील ने दलील दी कि हालांकि आयोग के पास असीमित अधिकार नहीं हैं, लेकिन उसके पास यह अधिकार जरूर है कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी फैसले ले सके कि मतदान प्रक्रिया स्वतंत्र, निष्पक्ष और हिंसा-मुक्त रहे।
उन्होंने कोर्ट के सामने उन नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों का ब्योरा भी पेश किया, जिनका तबादला किया गया है, जिन्हें बदला गया है, या जिन्हें चुनाव वाले अन्य राज्यों में डेपुटेशन पर भेजा गया है।
मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की डिवीजन बेंच द्वारा इस मामले पर अगली सुनवाई बुधवार के लिए तय की गई है।
–आईएएनएस
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