नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग को आज 21 दिन हो गए हैं। इस बीच सऊदी अरब की राजधानी रियाद से एक भारतीय नागरिक की मौत की खबर सामने आई है।
सऊदी अरब में भारतीय दूतावास की ओर से जारी एक बयान में भारतीय नागरिक की मौत की बात सामने आई। दूतावास ने भारतीय नागरिक की दुखद मृत्यु पर भारत सरकार और दूतावास की ओर से गहरी संवेदना व्यक्त की है।
दूतावास की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया गया, ”रियाद में 18 मार्च को हुई हालिया घटनाओं में एक भारतीय नागरिक के दुखद निधन पर भारतीय दूतावास अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता है। दूतावास मृतक के परिवार और स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है। हम इस मामले में हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
सूत्रों के अनुसार ईरान लगातार उन पड़ोसी देशों पर हमलावर बना हुआ है जो इस युद्ध में अमेरिका-इजरायल के सहयोग में हैं। सऊदी अरब पर भी ईरान की ओर से लगातार हमले किए जा रहे हैं।
इससे पहले भी गुरुवार को ही सऊदी की राजधानी रियाद में हुई मीटिंग में 12 इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान में ईरान से हमले तुरंत रोकने और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की बात कही थी।
यह बयान अजरबैजान, बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, तुर्किए और संयुक्त अरब अमीरात के मंत्रियों की ओर से जारी किया गया था।
बयान में मंत्रियों ने खाड़ी देशों-जॉर्डन, अजरबैजान और तुर्किए पर हमलों की निंदा की। विदेश मंत्रियों ने कहा कि ईरान ने रिहायशी क्षेत्रों, नागरिकों के इलाके के ढांचे, जिसमें तेल की फैसिलिटी, डीसेलिनेशन प्लांट, एयरपोर्ट, रेजिडेंशियल बिल्डिंग और डिप्लोमैटिक जगहों को टारगेट किया है।
वहीं, शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने बीते दिनों दिए एक बयान में दावा किया था कि अमेरिका और इजरायल कुछ स्थानों से पश्चिम एशिया में अरब देशों पर हमले कर रहे हैं। अराघची ने कहा था कि ईरान क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर बैठक करने और हमलों के लक्ष्यों की प्रकृति की जांच के लिए एक संयुक्त समिति बनाने के लिए तैयार है।
अब्बास अराघची ने दावा किया था कि अमेरिका ने ईरान के शाहेद 136 ड्रोन के समान एक ड्रोन विकसित किया है, जिसका नाम “लुकास” है, जो अरब देशों में लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए है।
अब्बास अराघची का दावा था कि ईरान के हमले केवल अमेरिकी ठिकानों और हितों को निशाना बनाते हैं, और यह उन हमलों के बदले में है जो इन साइट्स से शुरू किए गए थे।
–आईएएनएस
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