धार्मिक अधिकारों के उल्लंघन पर तुर्की को स्पेशल वॉच लिस्ट में शामिल करने की मांग : अमेरिकी निगरानी संस्था


अंकारा, 16 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से आग्रह किया है कि तुर्की को स्पेशल वॉच लिस्ट (एसडब्‍ल्‍यूएल) में शामिल किया जाए, क्योंकि वहां धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघन हो रहे हैं। यह सिफारिश इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम एक्ट (आईआरएफए) के तहत की गई है।

अमेरिकी सरकार के सलाहकार निकाय और विदेशों में धार्मिक स्वतंत्रता की निगरानी करने वाले यूएससीआईआरएफ ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में सुझाव दिया कि भविष्य की अमेरिकी सुरक्षा सहायता और द्विपक्षीय व्यापार नीतियों को तुर्की में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति में सुधार से जोड़ दें।

रिपोर्ट में कहा गया कि 2025 में तुर्की में धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर और लगातार उल्लंघन किए गए, जैसा कि पिछले वर्ष भी देखा गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की सरकार ने कथित रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर कई वर्षों से चल रहे अभियान को तेज किया है। इसके तहत कम से कम 375 विदेशी ईसाई पादरियों, उनके परिवारों और अन्य धार्मिक कार्यकर्ताओं की कानूनी निवास स्थिति खत्म कर दी गई है।

रिपोर्ट में कहा गया कि विपक्षी नेताओं के समर्थन में राजनीतिक अभिव्यक्ति पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई के बीच, सरकार ने धार्मिक स्वतंत्रता का भी उल्लंघन किया। राज्य संस्थानों में धर्मनिरपेक्ष विचारों को सजा दी गई और तुर्की दंड संहिता की धारा 216 को व्यवहार में ईशनिंदा (ब्लासफेमी) कानून की तरह लागू किया गया।

जनवरी में रक्षा मंत्रालय ने पांच नए लेफ्टिनेंट और उनके तीन वरिष्ठ अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया, क्योंकि उन्होंने शपथ ग्रहण समारोह में एक धर्मनिरपेक्ष शपथ चुनी थी। सरकार ने इस्लाम के खिलाफ माने जाने वाले ऑनलाइन बयानों की भी निगरानी की और धार्मिक असहमति जताने वालों पर मुकदमे चलाए।

यूएससीआईआरएफ ने अमेरिकी कांग्रेस से आग्रह किया कि वह तुर्की में धार्मिक स्वतंत्रता पर सुनवाई करे और कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल को तुर्की भेजे, ताकि कुछ खास मुद्दों को उठाया जा सके। इन मुद्दों में सार्वजनिक शिक्षा में एफओआरबी (धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता) का दमन, झूठे सुरक्षा खतरों के बहाने अमेरिकी पादरियों को देश में दोबारा प्रवेश से रोकना और तुर्की में उन शरणार्थियों की स्थिति शामिल है, जिन्हें अपने गृह देशों में धार्मिक उत्पीड़न के कारण वापस भेजे जाने का वास्तविक डर है।

रिपोर्ट में कहा गया कि ईस्टर्न ऑर्थोडॉक्स चर्च के सदस्य अब भी हैल्की स्‍कूल को दोबारा खोलने की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। यह स्कूल 54 साल पहले सरकारी नीतियों के कारण बंद कर दिया गया था।

इस कारण ईस्टर्न ऑर्थोडॉक्स, प्रोटेस्टेंट और अन्य ईसाई समुदायों को देश के भीतर धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर नहीं मिलता और उन्हें विदेशों में सेमिनरी कार्यक्रमों में जाना पड़ता है।

रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की की लगभग 8.5 करोड़ आबादी में से 99.8 प्रतिशत को मुस्लिम माना जाता है। इसमें 1 से 2.5 करोड़ अलेवी भी शामिल हैं, जिनमें से कई खुद को मुस्लिम नहीं मानते।

इसके अलावा, जाफरी शिया मुसलमान बहुत छोटी संख्या में हैं। सरकार के अनुसार, एक प्रतिशत से भी कम आबादी गैर-मुस्लिम है। रिपोर्ट में कहा गया कि तुर्की का धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक ढांचा इस 102 साल पुराने गणराज्य का मूल सिद्धांत है, जो संविधान में भी दिखाई देता है और जिसमें धर्म और अंतरात्मा की स्वतंत्रता को मान्यता दी गई है। लेकिन हाल के वर्षों में जनसंख्या और राजनीति से जुड़े रुझानों के कारण गैर-सुन्नी मुस्लिम समुदायों के प्रति सरकारी और सामाजिक भेदभाव में वृद्धि हुई है।

–आईएएनएस

एवाई/


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