पहले हाईकोर्ट से झटका, अब अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया दरवाजा


नई दिल्ली, 15 मार्च (आईएएनएस)। दिल्ली शराब घोटाले मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उन्होंने इस केस में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अपील पर सुनवाई कर रही दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच से दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की है।

अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि अगर यही जज सुनवाई करते हैं तो निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं हो पाएगी। इससे पहले, उन्होंने बेंच बदलने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय को भी पत्र लिखा था। उन्होंने इस अनुरोध को ठुकरा दिया था। दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच के सामने सोमवार को इसी मामले की सुनवाई होगी।

यह मामला सीबीआई की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें उसने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें इस केस के सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया गया था। इनमें केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी शामिल हैं। हाल ही में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने सीबीआई की याचिका पर केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य लोगों को नोटिस जारी किया था।

अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट के 9 मार्च के उस आदेश को भी चुनौती दी है, जिसमें बेंच ने बिना उनका पक्ष सुने सीबीआई के जांच अधिकारी को लेकर निचली अदालत की ओर से की गई टिप्पणी पर रोक लगा दी थी। अरविंद केजरीवाल की ओर से सोमवार को चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने जल्द सुनवाई की मांग की जा सकती है।

इसी बीच, ईडी ने भी एक याचिका दायर कर ट्रायल कोर्ट की उन टिप्पणियों को हटाने की मांग की है, जो उसके खिलाफ की गई थीं। ईडी का कहना है कि जब ट्रायल कोर्ट ने यह फैसला दिया था, तब वह उस मामले में पक्षकार नहीं थी और उसे अपनी बात रखने का मौका भी नहीं मिला। सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अदालत में कहा कि ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां ईडी की चल रही जांच को प्रभावित कर सकती हैं, जो प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत चल रही है।

वहीं, हाईकोर्ट ने कहा कि ईडी की शिकायत पर भी उसी समय विचार किया जाएगा, जब सीबीआई की याचिका पर सुनवाई होगी, क्योंकि ट्रायल कोर्ट के पूरे फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। सीबीआई का कहना है कि ट्रायल कोर्ट का फैसला गलत है और बिना मुकदमे के ही आरोपियों को बरी कर दिया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, आबकारी नीति में कथित रूप से कुछ निजी शराब कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बदलाव किए गए थे और इसके बदले रिश्वत ली गई थी।

–आईएएनएस

डीकेपी/


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