बेंगलुरु: वीआरएचपीएल और 19 आरोपियों के खिलाफ ईडी ने टीडीआर घोटाले में दायर की अभियोजन याचिका


बेंगलुरु, 12 मार्च (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय के बेंगलुरु क्षेत्रीय कार्यालय ने 11 मार्च 2026 को टीडीआर घोटाले के मामले में मेसर्स वालमार्क रियल्टी होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड (वीआरएचपीएल) और 19 अन्य एजेंसियों के खिलाफ अभियोजन याचिका दायर की है, जिसमें कुछ बीबीएमपी अधिकारियों का भी नाम शामिल है।

टीडीआर/डीईआरसी का मतलब है एक प्रमाणपत्र जो बताता है कि किसी स्थल या प्लॉट के मालिक के लिए कितनी बिल्ट-अप एरिया निर्धारित है। मालिक इस क्षेत्र को या तो बेच सकता है या कहीं और इस्तेमाल कर सकता है। यह भूमि उस जगह से प्राप्त होती है जो शहरी स्थानीय निकायों द्वारा सार्वजनिक उपयोग जैसे सड़क चौड़ीकरण, मनोरंजन क्षेत्र आदि के लिए मास्टर प्लान के अनुसार मुफ्त में अधिग्रहित की जाती है।

ईडी ने यह जांच एसीबी, बेंगलुरु द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। एफआईआर की चार्जशीट के अनुसार, वीआरएचपीएल के डायरेक्टर रतन लाठ ने डीआरसी हासिल करने के बाद टीडीआर को रियल एस्टेट कंपनियों और व्यक्तियों को बेचा, जिससे कुल लगभग 27.68 करोड़ रुपए का अवैध लाभ हुआ।

एफआईआर की चार्जशीट के अनुसार, टीडीआर ब्रोकर के सुरेश, के गौतम और उनके सहयोगियों ने पहले से भूमि मालिकों और कुछ बीबीएमपी अधिकारियों के साथ साजिश की। उन्होंने यह छिपाया कि भूमि पहले ही बेची गई थी और भवन की कीमत गलत तरीके से 1.26 करोड़ रुपए दिखाई दी, जिससे कुल 10,672.14 वर्ग मीटर के डीआरसी जारी किए गए।

पहले ईडी ने वीआरएचपीएल के कार्यालय में, उसके डायरेक्टर और कुछ बिल्डर, ब्रोकर और नकली टीडीआर बॉन्ड के 9 जगहों पर छापे मारे, जिससे ब्रोकरों और पूर्व मालिकों की भूमिका सामने आई। जांच में पता चला कि ब्रोकर बीएस सुरेंद्रनाथ, के. गौतम और के. सुरेश ने वीआरएचपीएल और बीबीएमपी अधिकारियों के साथ मिलकर कौडेनहल्ली की भूमि को रेवन्ना के वारिसों के नाम पर म्यूटेशन दाखिल किया गया, जबकि भूमि पहले ही कई मजदूरों को बेच दी गई थी। इसके लिए उन्होंने सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी और एग्रीमेंट का इस्तेमाल किया।

जांच में यह भी सामने आया कि के. सुरेश और के. गौतम ने मुनिराजू और श्रीनिवास के साथ एग्रीमेंट किए ताकि वे टीडीआर लाभ प्राप्त कर सकें, जबकि वे भूमि के वैध मालिक नहीं थे। पावर ऑफ अटॉर्नी इंदिरानगर सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में दर्ज किए गए ताकि बीबीएमपी से टीडीआर प्राप्त किया जा सके। यह भी पता चला कि भूमि पहले ही बेच दी गई थी और वहां कोई योग्य संरचना नहीं थी, फिर भी पास की भूमि में बने भवन को गलत तरीकों से संबंधित भूमि में सर्वेयर डेवलपमेंट सर्टिफिकेशन जारी किया गया।

जांच में यह भी पता चला कि टीडीआर से हुई आय को कई दस्तों के माध्यम से रियल एस्टेट खरीद और सामान्य व्यय में शामिल किया गया, ताकि अपराध से हुई आय का इस्तेमाल किया जा सके।

इस तरह से कई अन्य जगहों पर भी बीबीएमपी द्वारा सड़क चौड़ीकरण के लिए घोषित भूमि में टीडीआर घोटाला किया गया, जिसकी जांच अभी चल रही है।

–आईएएनएस

एएमटी/डीएससी


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