कोलकाता का जुड़वां शहर हावड़ा की विरासत 500 साल पुरानी, 7 विधानसभा क्षेत्रों वाली औद्योगिक सीट पर टीएमसी मजबूत


हावड़ा, 12 मार्च (आईएएनएस)। हावड़ा लोकसभा सीट पश्चिम बंगाल की महत्वपूर्ण संसदीय सीटों में से एक है। यह हावड़ा जिले के अधिकांश शहरी इलाकों को कवर करती है और कोलकाता महानगरीय क्षेत्र का हिस्सा है। हावड़ा लोकसभा क्षेत्र में कुल 7 विधानसभा क्षेत्रों में 169-बल्ली, 170-हावड़ा उत्तर, 171-हावड़ा मध्य, 172-शिबपुर, 173-हावड़ा दक्षिण, 174-संकरैल और 175-पांचला शामिल हैं। ये सभी क्षेत्र हावड़ा शहर और उसके आसपास के औद्योगिक-शहरी इलाकों पर केंद्रित हैं।

पश्चिम बंगाल के प्रमुख जिलों में हावड़ा का नाम गिना जाता रहा है, जिसका कुल क्षेत्रफल 1,467 वर्ग किलोमीटर है। 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की आबादी 48,50,029 है, जो इसे राज्य के सबसे घनी आबादी वाले जिलों में से एक बनाती है। साक्षरता दर 83.31 प्रतिशत है, जो राज्य के औसत से ऊपर है। जिले में 14 विकास ब्लॉक, 157 गांव, एक नगर निगम (हावड़ा म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन) और 26 पुलिस स्टेशन हैं। हावड़ा जिला अत्यधिक शहरीकृत है और कोलकाता के बाद दूसरा सबसे छोटा जिला है।

हावड़ा शहर हुगली नदी के पश्चिमी तट पर स्थित है और इसे कोलकाता का जुड़वां शहर कहा जाता है। यह कोलकाता मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (सीएमडीए) के क्षेत्र में आता है। हावड़ा कोलकाता और पूरे पश्चिम बंगाल के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रांसपोर्ट हब और प्रवेश द्वार है। यहां भारत का सबसे पुराना और व्यस्त रेलवे स्टेशन हावड़ा स्टेशन है, जो देश के सबसे बड़े रेलवे जंक्शनों में शुमार है। शहर में हजारों साल पुरानी विरासत है, जो प्राचीन बंगाली साम्राज्य भुरशुत से जुड़ी है।

अगर जिले के इतिहास की बात करें, तो यह करीब 500 साल से अधिक पुराना है। वेनिस के यात्री सेसारे फेडेरिसी ने 1578 में अपनी डायरी में ‘बुट्टोर’ नामक स्थान का जिक्र किया था, जो बड़े जहाजों के आने-जाने वाला बंदरगाह था। यह आज के बटोर इलाके से जुड़ा माना जाता है। 1495 में बिप्रदास पिपिलई की बंगाली कविता ‘मनसमंगल’ में भी बटोर का उल्लेख है। 1713 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने मुगल बादशाह फर्रुखसियर से हुगली नदी के पश्चिमी किनारे पर पांच गांवों (सालिका, हरिरा, कसुंडेह, रामकृष्णपुर और बत्तर) को बसाने की अनुमति मांगी थी। ये गांव आज हावड़ा शहर के प्रमुख हिस्से हैं।

हावड़ा लोकसभा सीट पर 2024 में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का दबदबा रहा है। 2024 लोकसभा चुनाव में टीएमसी के प्रसून बनर्जी ने 6,26,493 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। भाजपा के डॉ. रथिन चक्रवर्ती को 4,57,051 वोट मिले, जबकि सीपीआई(एम) के सब्यसाची चटर्जी को 1,52,005 वोट प्राप्त हुए।

2019 लोकसभा चुनाव में भी प्रसून बनर्जी ने जीत हासिल की थी। उन्होंने 5,76,711 वोट प्राप्त कर भाजपा के रंतिदेव सेनगुप्ता (4,73,016 वोट) को हराया। सीपीआई(एम) के सुमित्रो अधिकारी को 1,05,547 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की सुव्रा घोष को 32,107 वोट प्राप्त हुए।

वहीं, 2014 लोकसभा चुनाव में प्रसून बनर्जी ने 4,88,461 वोट लेकर सीपीएम के श्रीदीप भट्टाचार्य (2,91,505 वोट) को हराया था। उस समय टीएमसी को 43.4 प्रतिशत, सीपीएम को 25.9 प्रतिशत और भाजपा को 22.05 प्रतिशत वोट मिले थे। कांग्रेस मात्र 5.62 प्रतिशत पर सिमट गई थी।

हावड़ा सीट औद्योगिक महत्व की है। यहां जूट मिलें, इंजीनियरिंग उद्योग, बंदरगाह और रेलवे सुविधाएं प्रमुख हैं। लेकिन प्रदूषण, ट्रैफिक और बेरोजगारी जैसी समस्याएं भी बनी हुई हैं। राजनीतिक रूप से यह टीएमसी का गढ़ रहा है, जहां ममता बनर्जी की पार्टी मजबूत पकड़ रखती है।

–आईएएनएस

एससीएच/एमएस


Related Articles

Latest News