बांग्लादेश चुनाव के बाद हुई हिंसा में 10 की मौत, 476 घायल: रिपोर्ट


ढाका, 5 मार्च (आईएएनएस)। बांग्लादेश में चुनाव बाद हिंसा को लेकर एक रिपोर्ट जारी की गई है, जो बताती है कि चुनाव के बाद हिंसक वारदातों में बढ़ोतरी हुई है। मानवाधिकार संगठन ‘ओधिकार’ के अनुसार, 13 से 28 फरवरी के बीच 104 अलग-अलग घटनाओं में करीब 10 लोग मारे गए और 476 घायल हुए। स्थानीय मीडिया ने इस रिपोर्ट के हवाले से खबर प्रकाशित की है।

द डेली स्टार के अनुसार, ओधिकार के प्रोजेक्ट, “लोकतंत्र बहाली में मदद: बांग्लादेश चुनावी हिंसा की निगरानी और रिपोर्टिंग” के तहत गुरुवार को नए आंकड़े जारी किए, जो ‘यूरोपियन पार्टनरशिप फॉर डेमोक्रेसी’ की मदद से तैयार किए गए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 28 प्रतिशत घटनाएं (कुल 29) बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और उसके अलग हुए धड़े के बीच आपसी झगड़े से जुड़ी थीं। इन झगड़ों में चार की मौत हुई और 136 लोग घायल हुए थे।

पीड़ितों में बीएनपी कार्यकर्ता और उनके साथी, जमात-ए-इस्लामी समर्थक, अवामी लीग के समर्थक, बीएनपी से जुड़े निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थक और आम लोग शामिल थे।

खुलना डिवीजन में सबसे ज्यादा मौत रिकॉर्ड हुईं; यहां तीन लोगों की मौत हुई और 191 लोग घायल हुए।

राजशाही और बारिशाल डिवीजन में दो-दो मौतें हुईं, जबकि ढाका डिवीजन में एक शख्स की मौत हो गई और 90 लोग घायल हो गए। वहीं, चटगांव और मैमनसिंह डिवीजन में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई।

50 चुनाव क्षेत्रों में सीधे ऑब्जर्वेशन के जरिए, ओधिकार ने 17 इलाकों में 32 घटनाओं को डॉक्यूमेंट किया। इनमें से पांच की मौत और 41 के घायल होने को रिकॉर्ड में शामिल किया गया । जिन जगहों पर नजर रखी गई, उनमें से सबसे अधिक घायल खुलना-3 चुनाव क्षेत्र में पाए गए।

रिपोर्ट की गई घटनाओं में मारपीट और डराने-धमकाने से लेकर प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने की गतिविधि शामिल थी, जिसमें सिलहट में एक हिंदू मंदिर पर रात में हुआ हमला भी शामिल है।

44 प्रतिशत घटनाओं में जांच, केस फाइलिंग, हिरासत या भीड़ कंट्रोल के उपाय देखे गए, जबकि दूसरी घटनाओं में बहुत कम या कोई सरकारी दखल नहीं हुआ।

ओधिकार ने अधिकारियों से तुरंत और बिना किसी भेदभाव के जांच करने, आम लोगों की सुरक्षा पुख्ता करने और चुनाव के बाद होने वाली हिंसा को रोकने के लिए जल्दी चेतावनी जारी करने और तेजी से जवाब देने के तरीके लागू करने को कहा।

संगठन की सिफारिशों में पार्टी के अंदर झगड़े के मैनेजमेंट में सुधार, आम लोगों की सुरक्षा पक्का करना — खासकर कमजोर ग्रुप के लिए — और चुनाव बाद भी निगरानी और रोकथाम की रणनीतियों को बढ़ाना शामिल था।

–आईएएनएस

केआर/


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