मुंबई, 1 मार्च (आईएएनएस)। बॉलीवुड की चमक-दमक दूर से जितनी आकर्षक और खूबसूरत दिखती है, असल में उसके पीछे उतना ही दबाव और डर छिपा होता है। एक्शन और फिटनेस के लिए मशहूर टाइगर श्रॉफ की जिंदगी भी इससे अछूती नहीं है। पर्दे पर जहां वे दुश्मनों को मात देते नजर आते हैं, वहीं असल जिंदगी में एक समय ऐसा था, जब वह अंदर से कमजोर महसूस कर रहे थे। उन्होंने कई इंटरव्यू में फिल्म ‘हीरोपंती 2’ के फ्लॉप होने के बाद के समय और अपनी एंग्जायटी को लेकर खुलकर बात की।
2 मार्च 1990 को मुंबई में जन्मे टाइगर को साल 2022 में रिलीज हुई ‘हीरोपंती 2’ से काफी उम्मीदें थीं। यह उनकी पहली फिल्म ‘हीरोपंती’ का सीक्वल थी। फिल्म ने उनके करियर की शानदार शुरुआत की थी, ऐसे में उनको अपनी इस दूसरी फिल्म से भी बड़ी हिट की उम्मीदें थीं, लेकिन जब फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई, तो इसका असर सीधे उनके दिल और दिमाग पर पड़ा।
मशहूर फिल्ममेकर करण जौहर के चैट शो ‘कॉफी विद करण’ में टाइगर ने स्वीकार किया कि उस समय वे काफी टूट गए थे। उन्होंने करण को बताया, ”मैं लगातार बॉक्स ऑफिस के आंकड़े देखता रहता था और हर रिपोर्ट का असर मुझ पर हो रहा था। फिल्म की असफलता को मैंने काफी पर्सनल ले लिया था। मुझे लगा कि कहीं न कहीं मैं दर्शकों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। यही सोच मुझे अंदर से परेशान करती रही। एक दौर ऐसा था, जब मैं डिप्रेशन जैसा महसूस करने लगा था। हालांकि, मैंने हार नहीं मानी और खुद को संभालते हुए काम पर ध्यान लगाने की कोशिश की।”
टाइगर ने कहा, ”इंडस्ट्री में हर शुक्रवार परीक्षा की तरह होता है। फिल्म चले तो सब तारीफ करते हैं, और अगर फिल्म न चले तो आलोचना शुरू हो जाती है। ऐसे में खुद पर भरोसा बनाए रखना आसान नहीं होता। असफलता ने मुझे मजबूत बनाया और सिखाया कि सफलता हमेशा स्थायी नहीं होती, इसलिए जमीन से जुड़े रहना जरूरी है।”
फिल्मों की असफलता ही नहीं, टाइगर ने अपनी एंग्जायटी और उड़ान के डर को लेकर भी खुलकर बात की। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उन्हें फ्लाइट में बैठने से डर लगता है। किस्सा साझा करते हुए टाइगर ने कहा, ”एक बार फ्लाइट में तेज हलचल हुई, जिससे वे बुरी तरह घबरा गए। उस अनुभव ने मेरे मन में डर बैठा दिया।”
उन्होंने कहा, ”जब भी हवाई यात्रा करनी होती है, तो पहले मुझे मानसिक रूप से खुद को तैयार करना होता है। कई बार मैं असहज महसूस करता हूं, लेकिन अपने काम की वजह से सफर करना जरूरी होता है। एंग्जायटी कोई कमजोरी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी स्थिति है, जिससे कई लोग गुजरते हैं, बस हर कोई खुलकर बताता नहीं है।”
टाइगर का कहना है, ”मानसिक स्वास्थ्य पर बात करना जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति चिंता या डिप्रेशन से गुजर रहा है, तो उसे इसे छिपाने के बजाय किसी से साझा करना चाहिए।”
–आईएएनएस
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