कुंजरानी देवी: भारतीय वेटलिफ्टिंग की पहचान, कॉमनवेल्थ में दो बार देश को दिलाया स्वर्ण पदक


नई दिल्ली, 28 फरवरी (आईएएनएस)। एन. कुंजरानी देवी का नाम देश की सम्मानित वेटलिफ्टर के रूप में लिया जाता है। देश में वेटलिफ्टिंग को लोकप्रिय बनाने में उनका अहम योगदान रहा है।

1 मार्च 1966 को मणिपुर की राजधानी इम्फाल के कैरांग मायाई लेइकाई में जन्मी कुंजरानी ने 12 साल की उम्र में 1978 में वेटलिफ्टिंग शुरू की थी। सिंदम सिंशांग रेजिडेंट हाई स्कूल और बाद में महाराजा बोध चंद्र कॉलेज से पढ़ाई करते हुए उन्होंने वेटलिफ्टिंग में अपनी विशेषज्ञता बनाई।

उनका नेशनल करियर 1985 में शुरू हुआ, जब उन्होंने 44, 46, और 48 किलोग्राम कैटेगरी में मेडल जीते। 1987 में त्रिवेंद्रम में दो नए नेशनल रिकॉर्ड बनाए। उन्होंने 46-किलोग्राम कैटेगरी में 1994 में पुणे में गोल्ड मेडल जीता, जबकि 48-किलोग्राम में मणिपुर में सिल्वर मेडल हासिल किया। कुंजरानी ने सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स में शामिल होकर खेलों में और ऊंचाइयां हासिल की। पुलिस चैंपियनशिप में उनका दबदबा रहा और 1996 से 1998 तक वे भारतीय पुलिस टीम की कप्तान भी रहीं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 1989 में कुंजरानी ने पहली बार बड़ी सफलता हासिल की थी। मैनचेस्टर में आयोजित वर्ल्ड विमेंस वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप 1989 में कुंजरानी ने तीन रजत पदक जीते थे। इसके बाद उन्होंने लगातार सात वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और पदक जीते। 1990 में बीजिंग और 1994 में हिरोशिमा में आयोजित एशियन गेम्स में उन्होंने कांस्य पदक जीते थे।

1991 में इंडोनेशिया, 1992 में थाईलैंड और 1993 में चीन में आयोजित एशियन वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में कुंजरानी ने लगातार तीन रजत पदक जीते। 1995 में साउथ कोरिया में 46-किलोग्राम कैटेगरी में दो स्वर्ण और एक ब्रॉन्ज मेडल भी उनके नाम रहा।

2002 और 2006 कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था। 2006 कॉमनवेल्थ गेम्स, मेलबर्न में 48 किलोग्राम महिला वेटलिफ्टिंग में 166 किलोग्राम का ओवरऑल लिफ्ट कर गोल्ड मेडल और गेम्स रिकॉर्ड स्थापित किया। इसमें स्नैच में 72 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 94 किलोग्राम शामिल थे।

भारत सरकार ने कुंजरानी देवी को 1990 में अर्जुन अवॉर्ड, 1996-1997 में खेल रत्न पुरस्कार और 2011 में पद्म श्री से सम्मानित किया था।

कुंजरानी देवी ने देश में सैकड़ों लड़कियों को वेटलिफ्टिंग के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया है।

–आईएएनएस

पीएके


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