नई दिल्ली, 25 फरवरी (आईएएनएस)। डायरेक्टरेट ऑफ एनफोर्समेंट (ईडी) ने मेसर्स अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एपीआईएल) के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने आगरा, उत्तर प्रदेश में स्थित विभिन्न अचल संपत्तियों को 598 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की भूमि के रूप में प्रोविजनली अटैच कर लिया है।
यह कार्रवाई सीबीआई की एसीबी, नई दिल्ली द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों (सिविल अपील नंबर 8977/2014) के अनुपालन में 23 जनवरी 2019 को दर्ज हुई थी। एफआईआर में आईपीसी की धारा 120-बी, 420 और पीसी एक्ट की धारा 13(2) रीड विद 13(1)(डी) के तहत एपीआईएल, सरकारी कर्मचारियों और प्राइवेट बिल्डरों/कॉलोनाइजरों पर आरोप हैं।
मामला हरियाणा के गुरुग्राम में सेक्टर 58 से 63 और 65 से 67 तक की जमीन अधिग्रहण और रिलीज में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं से जुड़ा है। जमीन को शुरू में लैंड एक्विजिशन एक्ट, 1894 की धारा 4 और 6 के तहत एचयूडीए द्वारा पब्लिक पर्पज (डेवलपमेंट और लैंड बैंक) के लिए नोटिफाई किया गया था। लेकिन बाद में मिलीभगत और फ्रॉड प्रक्रिया से अधिकांश जमीन प्राइवेट कॉलोनाइजरों को सौंप दी गई, जिससे कानूनी सुरक्षा उपाय कमजोर हुए और सरकारी पारदर्शिता पर सवाल उठे।
ईडी की जांच में सामने आया कि एपीआईएल ने कोलेबोरेशन एग्रीमेंट किए और नोटिफाइड जमीन के मालिकों से जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) हासिल किए। इनमें सेक्शन 4 नोटिफिकेशन से पहले कोई कंसीडरेशन न देना, कॉन्ट्रैक्ट शर्तों की कमी और पोस्ट-फैक्टो बदलाव जैसी खामियां थीं। नोटिफाइड स्टेटस से अनिश्चितता पैदा हुई, जिससे मालिकों की मोलभाव क्षमता कम हुई और जमीन मार्केट वैल्यू से बहुत कम रेट पर ट्रांसफर हुई। इससे एपीआईएल को गैर-कानूनी फायदा हुआ और जमीन मालिकों को नुकसान।
हरियाणा के डीटीसीपी ने बादशाहपुर गांव में 142.306 एकड़ जमीन पर एपीआईएल को लाइसेंस (18/2010, 21/2011, 26/2012) दिए, जिनमें 42.751 एकड़ नोटिफाइड जमीन को अधिग्रहण से मुक्त किया गया। इस जमीन पर ‘एसेंसिया’ और ‘वर्सालिया’ प्रोजेक्ट्स विकसित हुए, जो अब पूरी तरह डेवलप होकर थर्ड-पार्टी खरीदारों को बिक चुके हैं।
इसलिए, बेगुनाह खरीदारों और प्रोजेक्ट कब्जे में दिक्कत से बचाने के लिए ईडी ने एपीआईएल से जुड़ी एसोसिएट कंपनियों/व्यक्तियों के नाम पर आगरा में अन्य अचल संपत्तियां अटैच कीं। जांच में पाया गया कि ये एंटिटी लैंड-होल्डिंग व्हीकल के रूप में इस्तेमाल हुईं, जबकि फंडिंग, कंट्रोल और लाभकारी मालिकाना एपीआईएल के पास था।
–आईएएनएस
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