ढाका, 24 फरवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल के एक प्रॉसिक्यूटर (अभियोजक) बीएम सुल्तान महमूद ने ट्रिब्यूनल के पूर्व मुख्य अभियोजक मोहम्मद ताजुल इस्लाम और उनके सहयोगी गाजी मोनावर हुसैन तमीम पर भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि ताजुल के नेतृत्व में एक सिंडिकेट ने चीफ प्रॉसिक्यूटर की कुर्सी को पैसे कमाने का जरिया बना लिया।
बीएम सुल्तान के अनुसार, जुलाई 2024 में हुई प्रदर्शनों के दौरान छह लोगों की हत्या और शव जलाने से जुड़े मामले में आरोपी अबजल की पत्नी तमीम के कमरे में गई थी। इस बात की जानकारी देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई और उन्हें ही डांटा गया। बाद में तमीम ने कई लोगों के सामने स्वीकार किया कि अबजल की पत्नी उनके कमरे में आई थी।
सुल्तान ने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में सरकारी गवाहों के चयन और आरोपी बनाने में अनियमितताएं हुईं। उन्होंने वीडियो सबूत होने का भी दावा किया।
बांग्लादेश के प्रमुख अखबार द डेली स्टार के हवाले से बीएम सुल्तान महमूद ने कहा, “मुख्य अभियोजक ने सिर्फ यह पूछा कि आरोपी की पत्नी उनके कमरे में क्यों गई थी। मामला वहीं समाप्त हो गया।”
सुल्तान ने आरोप लगाया कि आखिरी फैसले में बरी होने से पहले अबजल को बाद में सरकारी गवाह बना दिया गया था।
उन्होंने चंखरपुल मामले पर भी चिंता जताई, जहां जुलाई के प्रदर्शनों के दौरान कानून लागू करने वालों ने कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं, जिससे कम से कम छह लोग मारे गए।
सुल्तान का दावा है कि एक वीडियो क्लिप में सब-इंस्पेक्टर अशरफुल को अन्य लोगों को गोली चलाने का आदेश देते हुए देखा गया, फिर भी उन्हें आरोपी बनाने के बजाय गवाह बना दिया गया। उन्होंने कहा कि मेरे पास वह वीडियो है। जरूरत पड़ने पर कोई भी इसे देख सकता है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जुलाई 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान रंगपुर जिले में अबू सईद हत्या मामले से सहायक पुलिस आयुक्त अल इमरान हुसैन को कथित रूप से क्यों हटा दिया गया, जबकि कई गवाहों ने अदालत में इमरान को दोषी ठहराया था।
सुल्तान ने आगे आरोप लगाया कि पूर्व आईजीपी चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को बिना किसी सही वजह के सरकारी गवाह बना दिया गया।
आरोपों का जवाब देते हुए सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ताजुल ने कहा, “ये निजी आरोप हैं, जिनके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। हमने ऐसे दावों की जांच की है और वे पूरी तरह से झूठे हैं। अगर कोई निजी दुश्मनी से ऐसी कहानियां फैलाता है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है।”
सोमवार को, अमीनुल इस्लाम ने आईसीटी के चीफ प्रॉसिक्यूटर का चार्ज ऑफिशियली संभाल लिया। उन्होंने ट्रिब्यूनल परिसर में जाने वाले चीफ प्रॉसिक्यूटर ताजुल से चार्ज लिया।
2024 में शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के गिरने के बाद ताजुल को मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने आईसीटी का चीफ प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किया था।
उनके कार्यकाल के दौरान कई मामलों में कथित प्रक्रियागत चूक और विवादास्पद फैसलों को लेकर न्यायाधिकरण वैश्विक जांच के दायरे में आ गया था।
–आईएएनएस
अर्पित याज्ञनिक/वीसी
