Monday, February 23, 2026

जूडो खिलाड़ी रोहित माजगुल ने राष्ट्रमंडल और एशियन गेम्स 2026 के लिए क्वालीफाई किया


अहमदाबाद, 23 फरवरी (आईएएनएस)। गुजरात के उभरते हुए जूडो खिलाड़ी रोहित माजगुल (66 किलोग्राम) ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 और एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई कर लिया है। रोहित ने नई दिल्ली में आयोजित जूडो चयन ट्रायल में शानदार प्रदर्शन किया।

नेशनल जूडो ट्रायल्स के बेस्ट ऑफ थ्री फाइनल में माजगुल का सामना हरियाणा के गर्वित से हुआ। फाइनल मैच का निर्णायक बाउट गोल्डन स्कोर तक गया, जहां माजगुल ने शानदार ओ-गोशी लगाकर वाजा-अरी स्कोर करते हुए अपनी जीत पक्की की।

23वें कॉमनवेल्थ गेम्स 23 जुलाई से 2 अगस्त तक स्कॉटलैंड के ग्लासगो में होने वाले हैं, जबकि एशियन गेम्स 19 सितंबर से जापान के ऐची-नागोया में खेले जाएंगे।

जीत के बाद रोहित माजगुल ने कहा, “कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई करना मेरे लिए एक सपने के सच होने जैसा है। ट्रायल्स में हर बाउट ने मेरी सहनशक्ति को परखा है, लेकिन मुझे ट्रेनिंग और अपने कोच पर भरोसा था कि वह मुझे गाइड करेंगे। यह जीत सिर्फ मेरी नहीं है, बल्कि यह ‘विजयी भारत फाउंडेशन’ की कड़ी मेहनत और सपोर्ट की एक झलक है।”

गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के एक छोटे से आदिवासी गांव, तलाला के रहने वाले माजगुल विजयी भारत फाउंडेशन में ट्रेनिंग लेते हैं। रोहित को यह सफलता अचानक नहीं मिली है, बल्कि वह पिछले दो सीनियर नेशनल्स में एक भी मुकाबला नहीं हारे हैं, जो उनकी निरंतरता और कौशल को दिखाता है।

विजयी भारत फाउंडेशन के कोचिंग स्टाफ की देखरेख में रोहित की सफलता फाउंडेशन के ट्रेनिंग इकोसिस्टम की ताकत को दिखाती है। उनकी कामयाबी भारतीय जूडो में गुजरात की बढ़ती हिस्सेदारी को भी दिखाती है। इसके साथ ही यह राज्य की स्पोर्टिंग कम्युनिटी के लिए गर्व का पल है।

1951 में नई दिल्ली में हुए पहले एशियन गेम्स में भारतीय जूडोका ने संदीप बयाला (मेंस 65 किलोग्राम), कावास बिलिमोरिया (मेंस 95 किलोग्राम), श्याम सिंह गुर्जर (मेंस 95+ किलोग्राम), और बन्नू सिंह (मेंस ओपन वेट) के जरिए चार कांस्य पदक जीते हैं।

हिरोशिमा में 1994 के एशियन गेम्स में पूनम चोपड़ा ने महिलाओं के 56 किलोग्राम इवेंट में कांस्य पदक जीता था। वह किसी महाद्वीपीय प्रतियोगिता में जूडो मेडल जीतने वालीं एकमात्र भारतीय महिला हैं। यह एशियन गेम्स के जूडो इवेंट में भारत का इकलौता मेडल भी रहा है।

–आईएएनएस

शुभम/आरएसजी


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